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मंदिरों तथा धार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए विहिप की पहल

तिरुचिरापल्ली : विश्व हिन्दू परिषद् ( विहिप ) ने हीणुओं के मंदिरों और सधार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की पहल शुरू कर दी है। इसके लिए विहिप के केंद्रीय समिति के नेता साधू -संतों से मिलकर वैकल्पिक नियंत्रक संस्था के प्रारूप पर उनका मार्गदर्शन और विचार प्राप्त कर रहे हैं। विहिप चाहती है की हिन्दू  नियंत्रण हिन्दू समाज के हाथों में हो न की सरकार के अधीन। विहिप की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष आलोक कुमार , संयुक्त महासचिव  एस थानुमालयन जी  और दक्षिण भारत के संगठन मंत्री पी एम् नागराजन जी और तमिलनाडु के विहिप कार्यकर्त्ता लम्बे समय से लंबित इस विषय पर पुजारियों ,आध्यात्मिक गुरुओ, साधू संतों से मिलकर उनका मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा प्रमुख धर्मगुरुओं का मार्गदर्शन भी इस अध्याय में लिया जा रहा है।
इस वर्ष जुलाई में विश्व हिन्दू परिषद् की केंद्रीय समिति की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया  गया था कि हिन्दू मंदिरों और धार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराया जाना चाहिए।

विहिप का मानना है की भारत में मंदिर सामजिक , धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की धुरी हैं हिन्दू श्रद्धालु वहां जाते और दान देते हैं ताकि मंदिरों द्वारा चलाये जाने वाले  शैक्षणिक संस्थाएं , स्वास्थ्य सेवाएं , त्यौहार , धार्मिक और सामजिक कार्यक्रम एवं गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकेँ। मंदिरों ने संकट और आपातस्थिति  के समय भी समाज की भलाई के लिए आगे बढ़ -चढ़कर हिस्सा लिया है।  यह खेदजनक है की सरकारें मंदिरों को नियंत्रण में लेकर उसकी संपत्ति को अतार्किक रूप से तथा जबरन खर्च करती रही है। यहां तक की हिन्दू मंदिरों का पैसा गैर हिनू कार्यों में भी सरकारें खर्च करती हैं। हिन्दू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण अंगेजी शासन कल से चल रहा है और सरकार ने इसके लिए मद्रास हिन्दू रिलिजियस एंडोवमेंट एक्ट १९२६ को अस्तित्व में लाया था. इसके द्वारा मंदिरों का प्रबंधन और प्रशासन  अंग्रेजी सरकार नमे अपने अधीन ले लिया था और ाहज भी वह कला कानून चल रहा है जबकि मद्रास उच्च न्यायालय ने सरकार को चिदंबरम नटराज मंदिर मामले में स्पष्ट निर्देश दिया था कि मंदिर को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर  दिया  जाय।

विहिप का स्पष्ट मत है कि अब समय आ गया है कि हिंदू मंदिरों की व्यवस्था हिन्दुओं को सौंपी जाए और वहां पूरी पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के साथ वैकल्पिक प्रबंधन व्यवस्था बनायी जय। नई प्रबंधन व्यवस्था में मंदिर की परम्परा , वंशानुगत  स्थिति आदि को स्मरण में रखा जाना चाहिए..
तिरुचिरापल्ली : विश्व हिन्दू परिषद् ( विहिप ) ने हीणुओं के मंदिरों और सधार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की पहल शुरू कर दी है। इसके लिए विहिप के केंद्रीय समिति के नेता साधू -संतों से मिलकर वैकल्पिक नियंत्रक संस्था के प्रारूप पर उनका मार्गदर्शन और विचार प्राप्त कर रहे हैं। विहिप चाहती है की हिन्दू  नियंत्रण हिन्दू समाज के हाथों में हो न की सरकार के अधीन। विहिप की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष आलोक कुमार , संयुक्त महासचिव  एस थानुमालयन जी  और दक्षिण भारत के संगठन मंत्री पी एम् नागराजन जी और तमिलनाडु के विहिप कार्यकर्त्ता लम्बे समय से लंबित इस विषय पर पुजारियों ,आध्यात्मिक गुरुओ, साधू संतों से मिलकर उनका मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा प्रमुख धर्मगुरुओं का मार्गदर्शन भी इस अध्याय में लिया जा रहा है।
इस वर्ष जुलाई में विश्व हिन्दू परिषद् की केंद्रीय समिति की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया  गया था कि हिन्दू मंदिरों और धार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराया जाना चाहिए।

विहिप का मानना है की भारत में मंदिर सामजिक , धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की धुरी हैं हिन्दू श्रद्धालु वहां जाते और दान देते हैं ताकि मंदिरों द्वारा चलाये जाने वाले  शैक्षणिक संस्थाएं , स्वास्थ्य सेवाएं , त्यौहार , धार्मिक और सामजिक कार्यक्रम एवं गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकेँ। मंदिरों ने संकट और आपातस्थिति  के समय भी समाज की भलाई के लिए आगे बढ़ -चढ़कर हिस्सा लिया है।  यह खेदजनक है की सरकारें मंदिरों को नियंत्रण में लेकर उसकी संपत्ति को अतार्किक रूप से तथा जबरन खर्च करती रही है। यहां तक की हिन्दू मंदिरों का पैसा गैर हिनू कार्यों में भी सरकारें खर्च करती हैं। हिन्दू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण अंगेजी शासन कल से चल रहा है और सरकार ने इसके लिए मद्रास हिन्दू रिलिजियस एंडोवमेंट एक्ट १९२६ को अस्तित्व में लाया था. इसके द्वारा मंदिरों का प्रबंधन और प्रशासन  अंग्रेजी सरकार नमे अपने अधीन ले लिया था और ाहज भी वह कला कानून चल रहा है जबकि मद्रास उच्च न्यायालय ने सरकार को चिदंबरम नटराज मंदिर मामले में स्पष्ट निर्देश दिया था कि मंदिर को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर  दिया  जाय।

विहिप का स्पष्ट मत है कि अब समय आ गया है कि हिंदू मंदिरों की व्यवस्था हिन्दुओं को सौंपी जाए और वहां पूरी पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के साथ वैकल्पिक प्रबंधन व्यवस्था बनायी जय। नई प्रबंधन व्यवस्था में मंदिर की परम्परा , वंशानुगत  स्थिति आदि को स्मरण में रखा जाना चाहिए..

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