Opinion

चीन की शह पर हिंगलाज माता मंदिर में तोड़फोड़

पाकिस्तान स्थित हिंगलाज माता शक्तिपीठ में तोड़फोड़ की घटना एक बार फिर चर्चा में है। पिछले एक वर्ष में यह २२ वीं बार हुआ है कि कट्टरपंथी मुसलमानों ने इस मंदिर को क्षति पहुँचाने कोशिश की। हिन्दू बहुल भारत का विभाजन होने के बाद हिन्दुओं के ५१ शक्तिपीठों में ६ पाकिस्तान और बांग्लादेश में चले गए। पाकिस्तान और बांग्लादेश में पड़ने वाले शक्तिपीठों का उपयोग कट्टरपंथी मुसलमान भारत के लोगों के भयादोहन तथा उनकी भावनाओं को आहत करने के लिए करते हैं। हाल ही में हिंगलाज माता मंदिर में की गयी तोड़फोड़ को इसी दृष्टि देखा रहा है। इसके अलावा चार शक्तिपीठ पहले से नेपाल -चीन और श्रीलंका के अधीन हैं। नेपाल में दो शक्तिपीठ हैं ,चीन अधिकृत तिब्बत क्षेत्र में एक शक्तिपीठ है और एक श्रीलंका में। भारत में कुल ४१ मुख्य शक्तिपीठ बचे हैं।

नेपाल हिन्दू बहुल देश है और जाफना में हिन्दुओं की संख्या अधिक है तो वहां शक्तिपीठों को लेकर इस तरह समस्याएं नहीं होतीं लेकिन चीन ने जबसे तिब्बत पर अधिकार जमा लिया है भारतीय हिन्दुओं ने मनसा शक्तिपीठ जाना छोड़ दिया है।बांग्लादेश पर जब भारत से व्यापार में ‘ मोस्ट फेवर्ड नेशन ‘ का स्टेटस खतरे में दिखा तो वहां पिछले सात -आठ वर्षों से यशोशेश्वरी मंदिर सहित शेष पांच शक्तिपीठों में तोड़- फोड़ की घटनाएं रुक गयीं हैं जिसका लाभ भी बांग्लादेश को मिल रहा है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यशोशेश्वरी मंदिर में विधिवत पूजा किये जाने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री बांग्लादेश जाकर शक्तिपीठों में पूजा करने लगे है। इससे बांग्लादेश को पर्यटन राजस्व के रूप में अच्छी आय का अनुमान है।

देवी भागवत पुराण में १०८ ,कालिका पुराण में २६,शिवचरित्र में ५१ और दुर्गासप्तशती एवं तंत्रचूड़ामणि में ५२ शक्तिपीठों का विवरण है।इसमें सही आंकड़ा क्या है इसे स्पष्ट करते हुए देश के सभी शंकराचार्यों में सर्वाधिक शिक्षित और पुस्तकों के लेखन व सनातनधर्म प्रचार हेतु लगातार यात्रायें करने वाले पुरी मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्च्छलानन्द सरस्वती बताते हैं कि जिन ५१ स्थानों पर सती के शरीर के अंग कटकर गिरे वहां शक्ति के साथ भैरव भी हैं इसलिए वे सभी तीर्थ प्रमुख शक्तिपीठ हैं। इसके अलावा जिन स्थानों पर सती के आभूषण गिरे उन स्थानों को भी शक्तिपीठ जैसी मान्यता दी गयी है इसलिए देवी भागवत पुराण में १०८ शक्तिपीठ बताये गए हैं। दुर्गासप्तशती और तंत्रचूड़ामणि में उस हवनकुंड को भी शक्तिपीठ माना गया है जहाँ सती आत्मदाह किया था। कलिका पुराण में जिन २६ शक्तिपीठों वर्णन है वे उग्र शक्तिपीठ हैं जहाँ यूरेनियम -थोरियम जैसे ऊर्जातत्वों भण्डार है। उल्लेखनीय है कि स्वामी निश्च्छलानन्द सरस्वती अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के वैज्ञानिक भी रह चुके हैं।

हिंगलाज माता की पूजा हिंदू और मुसलमान दोनों ही करते हैं। बलुचिस्तान के मुसलमान हिंगला माता को नानी कहकर बुलाते हैं और उनको लाल कपड़ा, अगरबत्ती, मोमबत्ती, इत्र-फलुल चढ़ाते हैं। मुसलमानों में हिंगळाज देवी लाल चौले वाली माई व नानी के नाम से प्रसिद्ध है। दूर-दूर से मुसलमान नानी की हज करने व बावन स्थानों की परिक्रमा करने आते हैं। लाल कपड़ा, इत्र व अगरबत्ती इत्यादि चढ़ाकर पूजा करते हिंगळाज का हिंगळू से भी पूजन होता है । हिंगळाज देवी की पूजा जुमन खॉप के मुसलमान करते हैं। नगर थट्टे में भी पूजा जुमन खॉप के मुसलमान करते हैं। हिंगळाज देवी की पूजा करने का अधिकार जुमन खाँप की ब्रह्मचारिणी कन्या को मिला हुआ है।वह चांगळी माई कहलाती है। ये बलोच शाखा के ब्रोही मुसलमान हैं जो चारणों से ही मुसलमान बने हुए हैं तथा अपने को चारण मुसलमान ही कहते हैं । इनमें चांगळी माई साक्षात शक्ति स्वरूपा ही मानी जाती है। चांगळी माई अपना हाथ नई कन्या के सिर पर रखकर नई चांगळी माई तय करती है तथा उसे हिंगळाज देवी की पूजा का अधिकार प्रदान करती है। साथ ही माई की ज्योति जलाने का आशीर्वाद देती है । इसी परिवार का मुखिया कोटड़ी का पीर कहलाता है। हिंगळाज देवी की गुफा ही कोटड़ी कहलाती है।

पहले हिंगळाज देवी की यात्रा करांची (पाकिस्तान) के नागनाथ के अखाड़े से ऊँटों के माध्यम से व पैदल होती थी। छड़ीदार (अगवा) साथ रहता था । चालीस-पचास यात्री झरना कल-कल की ध्वनि से सुमेरियन देवी में यात्रा के लिए निकलते थे । पहले छड़ीदार करांची के भारती साधु होते समूह थे। यह निहंगों की गद्दी थी । अब छड़ीदार गृहस्थ होते हैं और वे ऊथल में रहते हैं ।

हिंगलाज माता का मंदिर को “पाकिस्तान का वैष्णो देवी” भी कहा जाता है।ऊंची पहाड़ी पर मां हिंगलाज का गुफा के अंदर दरबार है और भगवान शिव यहां भीमलोचन भैरव रूप में प्रतिष्ठित हैं।मंदिर के परिसर में भगवान गणेश, कालिका माता की प्रतिमा लगी हुई हैं। मंदिर के साथ ही गुरु गोरखनाथ का चश्मा ( झील )भी है जिसमें , कहते हैं कि माता हिंगलाज देवी यहां हर रोज सुबह स्नान के लिए आती हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के किनारे बसे इस शक्तिपीठ में देवी सती का ब्रह्मरंध्र (मस्तिष्क) गिरा था। हिंगला माता चारण वंश के लोगों की कुल देवी मानी जाती हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में माता हिंगलाज के दरबार में पाकिस्तान के साथ -साथ भारत से भी सैंकड़ों भक्त पहुंचते हैं। मनोरथ सिद्धि के लिए गुरुनानक देव, दादा मखान और गुरु गोरखनाथ जैसे आध्यात्मिक संत यहां आ चुके हैं। कहते हैं परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का अंत किया था। ऐसे में बचे हुए क्षत्रिय मां हिंगलाज की शरण में गए और अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना की तो हिंगलाज माता ने क्षत्रियों को ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया।रावण के वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान राम ने भी माता हिंगलाज की यहाँ पूजा की थी।मान्यता है , हिंगलाज माता के दरबार में जो भी भक्त शीश नवाता है, उसे पूर्वजन्मों के कष्टों को नहीं भोगना पड़ता।
यह मंदिर २००० वर्ष पुराना है। जब पाकिस्तान नहीं बना था और यह मंदिर भारत में आता था तब लाखों लोग हर रोज मां के दर्शन करने के लिए पहुंचते थे।हिंगलाज माता के मंदिर पर कई बार पाकिस्तान के चरमपंथी हमला कर चुके हैं लेकिन माता की मूर्ति को अब तक नुकसान नहीं पहुंचा है।स्थानीय हिंदू और मुसलमानों ने चरमपंथियों के हमले से मंदिर को कई बार बचाया भी है।एकबार जब आतंकवादी मंदिर को नुकसान पहुंचाने के लिए आए तब तब वे सभी हवा में लटक गए थे।तब से इस मंदिर के चमत्कार के आगे सभी शीश झुकाते हैं।

यह हिंदुओं और मुसलमानों का संयुक्त तीर्थ है तो फिर बार -बार हिंगलाज माता के मंदिर को क्षति पहुँचाने की कोशिश क्यों की जाती है ? राजनयिक और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में इसके सिर्फ धार्मिक कारण नहीं हैं। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में चीन का प्रभुत्व पाकिस्तान में बढ़ा है। हाल के दिनों में तालिबानियों का हस्तक्षेप भी पाकिस्तान में विस्तृत हुआ है।पकिस्तान में खुदाई के दौरान मंदिरों के अवशेष बड़ी संख्या में मिल रहे हैं। इंडोनेशिया समेत अनेक देश मंदिरों के मिलने के कारण हिंदुत्व के साथ स्वयं को जोड़ रहे हैं ऐसे में पकिस्तान के कट्टरपंथियों को भय है कि हिन्दू मंदिरों के कारण वहां भी हिन्दू धर्म की लहर उठ सकती है। पर यह बहुत ही सामान्य कारण है। दरअसल चीन मानसरोवर क्षेत्र पर निष्कंटक राज करना चाहता है जो यूरेनियम, क्रिस्टल ,रूबी ,नीलम जैसे बेशकीमती का विपुल खान है।इसलिए वह भारत को उकसाने की करवाई पाकिस्तानियों से भी करवाता रहता है। वह चाहता है कि भारत उलझा रहे और चीन कैलाश मानसरोवर से इन बहुमूल्य पदार्थों का खनन करे।

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