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कृषि वानिकी के सिद्धांतकार समरनाथ मिश्रा नहीं रहे

कृषि वानिकी सिद्धांत के जन्मदाता प्रख्यात कृषि क्रांतिकारी एवं पत्रकार समरनाथ मिश्र का भोपाल में कल निधन हो गया। वे पिछले दस वर्षों से भोपाल के नैसर्गिक चिकित्सा केंद्र में इलाज करा रहे थे। उन्होंने साठ दशक में अनुसूचित जाति की महिला से विवाह कर लोकनायक जयप्रकाश नारायण को ‘जाति मिटाओ, समाज बचाओ ‘ का सूत्र दिया था। राजनीति में हाशिये पर डाल दिये गए जयप्रकाश नारायण को इससे समाज सेवा का मार्गदर्शन मिला और कालांतर में वे इंदिरा गाँधी को सत्ताच्यूत कर लोकनायक कहलाए।

पूर्णिया (बिहार )की पत्रकारिता के स्तंभ रहे समरनाथ मिश्र पत्रकारिता में 1965 से 1995 तक सक्रिय रहे। वे भोपाल में स्वास्थ्य लाभ के लिए पिछले 10 सालों से रह रहे थे। समरनाथ मिश्र ने इंडियन नेशन, टाइम्स ऑफ इंडिया,और आर्यावर्त समेत कई प्रतिष्ठित अंग्रेजी के समाचार पत्रों के लिए पूर्णिया में प्रतिनिधित्व किया था।पूर्णिया में अखबार के स्थानीय कार्यालय की परंपरा उन्हीने अपने आवास लालकोठी से शुरु की।


स्व मिश्र पूर्णिया जिले के रामनगर ड्यौढि के जमींदार परिवार में जन्मे एवं प्रगतिशील विचारों के व्यक्ति थे। उनकी शादी मधेपुरा के मंडल परिवार में हुई थी। उनकी पत्नी भी पूर्णिया की प्रतिष्ठित शिक्षिका थीं।
स्व समरनाथ मिश्र ने पत्रकारिता के अलावा रामनगर में कृषि वानिकी के बड़े परिसर का विस्तार किया था जिसे उनके पुत्र हिमकर मिश्र और जामाता पतंजलि झा ने ऋषि खेती के केंद्र के रुप मे विकसित किया है।
स्व समरनाथ मिश्र स्वस्थ और दृढ़ पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे और वे उस जमाने के एक प्रभावी और शीर्षस्थ पत्रकार थे। भाषाई अशुद्धियों और पत्रकारिता के आचरण में दोषों को लेकर वे हमेशा पत्रकारिता की नई पीढ़ी को चेताते थे।

पिछले 10 सालों से वे किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और अपने पुत्र हिमकर मिश्रा,जामाता पतंजलि झा(भा रा से प्रधान आयकर आयुक्त मुंबई),पुत्री वर्षा झा,और पुत्रवधू सृजा मिश्रा की देखरेख में भोपाल रह रहे थे।


समरनाथ मिश्र के निधन से पूर्णिया के कई सामाजिक राजनैतिक व्यक्तित्वों और पत्रकारों ने अपनी अपनी शोक सम्वेदना जताई है। दो साल पहले जब वे पुर्णिया आये थे तो प्रेस क्लब ने उन्हें सम्मानित किया था और वे तब काफी भावुक हो गए थे। 10 अक्टूबर 2019 को लालकोठी में हुए सम्मान समारोह में केंद्रीय वित्त सचिव एएन झा भी शामिल थे।


उनकी कृषि वानिकी के देखे सपने को आज उनके पुत्र हिमकर मिश्र आगे बढ़ा रहे हैं जिसे राष्ट्रीय पहचान मिलती जा रही है। स्व मिश्र ने इसी साल दिसंबर से जनवरी तक का समय रामनगर के अपने समर शैल नेचुरल फार्म में ही रहकर बिताया था।

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