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लाउडस्पीकर पर अजान क्यों?

लाउडस्पीकर पर अजान का मुद्दा प्रख्यात पार्श्व गायक सोनू निगम ने उठाया था, जो 1990 के दशक में जे.डी. टाइटलर स्कूल में मेरे शिष्य रहे हैं। सोनू का कहना था कि वे शूटिंग-रिकॉर्डिंग से देर रात 2-3 बजे घर लौटते हैं और सुबह 4-5 बजे फज्र की अजान से उनकी नींद उचट जाती है। 

पहली बार 2017 में लाउडस्पीकर पर अजान का मुद्दा प्रख्यात पार्श्व गायक सोनू निगम ने उठाया था, जो 1990 के दशक में जे.डी. टाइटलर स्कूल में मेरे शिष्य रहे हैं। सोनू का कहना था कि वे शूटिंग-रिकॉर्डिंग से देर रात 2-3 बजे घर लौटते हैं और सुबह 4-5 बजे फज्र की अजान से उनकी नींद उचट जाती है। इसके बाद वे दोबारा सो नहीं पाते। उनकी चिंता जायज थी और आज भी प्रासंगिक है।

मैं भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ता हूं और रोजा रखता हूं। अभी मैं दुबई में हूं। एक टीवी चैनल पर चर्चा के दौरान हनुमान अखाड़ा के महंत राजू दास ने बड़ी सटीक बात कही। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद अजान के विरुद्ध नहीं है, बल्कि लाउडस्पीकर के प्रयोग को लेकर है। उन्होंने कहा कि उनके मंदिर में एक समय 6 लाउडस्पीकर लगे हुए थे, लेकिन अब केवल एक है। वह भी आरती, पूजा-अर्चना के समय ऊंची आवाज में नहीं बजता। यह विवाद धर्म या मजहब का नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण का है।

यहां यह समझना होगा कि अजान क्या है और आज समस्या क्यों बन गई है? असल में हजरत मुहम्मद साहब (सल्ल.) के समय जब नमाज फर्ज हुई तो लोगों को इबादत के लिए बुलाने के वास्ते अजान शुरू की गई, ताकि अजान के बाद लोग पांच बार मस्जिद में नमाज पढ़ने आएं। जब नमाजियों को बुलाने की बात हुई तो किसी ने कहा कि नगाड़ा बजाया जाए। किसी ने कहा कि तुरही, घंटा आदि बजाया जाए। लेकिन हजरत मुहम्मद साहब ने कहा कि इससे आम लोगों को परेशानी होगी। इसलिए एक व्यक्ति मस्जिद की मीनार या किसी ऊंची जगह से अजान दे, जिसे सुनकर आसपास के लोग मस्जिद आ सकेंं। यदि तेज आवाज के लिए लाउडस्पीकर जैसी किसी चीज का इस्तेमाल करना होता तो उसी समय अपना लिया जाता। लेकिन पैगंबर मुहम्मद किसी को कष्ट नहीं देना चाहते थे, इसलिए ऐसी किसी भी तकनीक को नहीं अपनाया।

दुबई एक इस्लामी देश है और यहां चप्पे-चप्पे पर मस्जिदें हैं। लेकिन किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर पर अजान या नमाज सुनाई नहीं देती है। हालांकि मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगे हुए हैं। लेकिन उन पर अजान और नमाज इस तरह से ऊंची आवाज में पढ़ी ही नहीं जाती, जिससे मरीजों, विद्यार्थियों या किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी हो। मैं खुद समय पर पांचों वक्त की नमाज पढ़ता हूं। इसके लिए अजान की जरूरत ही नहीं पड़ती। अल्लाह नीयत को कुबूल करता है, दिखावे और शोर-शराबे को नहीं।

मुस्लिम समाज की समस्या यह है कि वे हजरत मुहम्मद को तो मानते हैं, परंतु उनके बताए रास्ते पर चलने को तैयार नहीं हैं। तीन तलाक के खिलाफ कानून क्यों लाना पड़ा? इसलिए कि मुस्लिम पुरुष धड़ल्ले से अपनी बीवियों को कभी भोजन में नमक अधिक होने पर, तो कभी साड़ी पहनने या बाजार, मॉल आदि चले जाने पर जब चाहे तब तलाक, तलाक, तलाक बोलकर घर से निकाल देते थे। ऊपर से तर्क देते कि मुहम्मद साहब और अल्लाह की सबसे पसंदीदा चीजों में तलाक भी एक था।

लाउडस्पीकर की समस्या का समाधान यही है कि इसे बहुत कम यानी अनुमेय डेसिबल पर प्रयोग किया जाए, जिससे किसी को परेशानी न हो।

  • फिरोज बख्त अहमद (लेखक मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के पूर्व कुलाधिपति हैं)

सौजन्य : पाञ्चजन्य

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