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सिंधी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए सिंधी विवि जरूरीः भागवत

अमरावती, 28 अप्रैल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने गुरुवार को सिंधी समाज के एक कार्यक्रम में कहा कि सिंधी समाज ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए देश में सिंधी भाषा का अपना विश्वविद्यालय होना चाहिए। सिंधी भाषा, सभ्यता एवं संस्कृति के संरक्षण में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

डॉ. भागवत जी ने अमरावती में आयोजित सिंधी समाज के आराध्य संत अमर शहीद संत कंवरराम साहिबजी की पावन गद्दी पर साईंजी के वंशज साईं राजेशलाल साहिबजी के गद्दीनशीनी समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा कि सिंधी समाज ने देश के विभाजन के बात बीते 75 वर्षों में अपनी सभ्यता, भाषा और सांस्कृतिक विरासत को सम्भाल के रखा है। अपनी सभ्यता और भाषा की हर समाज को चिंता होती है। ऐसी ही चिंता यदि सिंधी समाज करता है तो यह बिल्कुल उचित है। देश में सिंधी सभ्यता और भाषा को संजोए रखने के लिए सिंधी विश्वविद्यालय होना जरूरी है।

सरसंघचालक ने कहा कि देश के लोगों को यह बात खलती है कि विभाजन के चलते हम अधूरे रह गए। इसलिए अखंड भारत का सपना जल्द साकार होगा। बतौर डॉ. मोहन जी भागवत, हर बात के लिए सरकार की ओर नहीं देखना चाहिए, बल्कि पूरे समाज को एकजुट होकर उसके लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संत और समाज एक साथ आ जाएगा, तो सरकार को उनके पीछे चलना ही होगा। इस अवसर पर डॉ. भागवत ने प्रख्यात चिंतक, लेखक, समाजसेवी एवं उद्यमी संजय शेरपुरिया द्वारा पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं की व्यथा पर लिखी पुस्तक ‘मैं माधोभाई, एक पाकिस्तानी हिन्दू’ का लोकार्पण किया। सरसंघचालक ने पाकिस्तान में रह रहे हिन्दू और पाकिस्तान से भारत आने वाले हिन्दुओं की पीड़ा को आवाज देते हुए कहा कि सिंधी समाज के लोग गंवा कर नहीं बल्कि सब कुछ छोड़ कर आए हैं और एक दिन भारत फिर से अखंड जरूर होगा।

संघ प्रमुख ने कहा कि जो भी कार्य प्रारंभ होता है, वह कभी न कभी अवश्य पूरा होता है। ‘मैं माधोभाई, एक पाकिस्तानी हिन्दू’ पुस्तक पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं की पीड़ा का जीता-जागता चित्रण है। भारत विभाजन की त्रासदी को झेलते हुए पिछले सात दशक से पाकिस्तान में हिंन्दुओं के साथ जिस तरह का बुरा बर्ताव किया गया है उसके बारे में वर्षों तक शोध करने के बाद संजय शेरपुरिया ने यह पुस्तक लिखी है। यह पुस्तक पाकिस्तान के हिन्दुओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार की सत्य गाथा है।

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