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वर्ष 2047 तक भारत’इस्लामिक राज’बनाने की ‘पी एफ आई ‘की योजना

पुलिस-सेना-न्यायिक सेवा जैसी महत्वपूर्व नौकरियों में ‘वफादार मुसलमानों’ को भर्ती कराने में लगी पी एफ आई

राजेश झा

पॉप्युलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पी एफ आई) ने भारत को वर्ष 2047 तक ‘ इस्लामिक राज ‘ में बदल देने के षड्यंत्र रचा है और इसमें पुलिस सेवा से जुड़े लोगों को भी उसने अपना कार्यकर्त्ता बना लिया है। पॉप्युलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पी एफ आई) से सम्बंधित होने के आरोप में झारखंड के दो सेवानिवृत पुलिस अधिकारियों मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों से पांच अलग-अलग अहम दस्तावेज जब्त किये गए हैं जिनमें भारत को 2047 तक इस्लामिक शासन की ओर ले जाने का जिक्र किया गया है।इस विषय में पटना के एसएसपी डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लो पर भी शक की सुई टिक गयी है।

पीएफआई के बरामद दस्तावेज में सरकारी विभागों में “वफादार मुसलमानों” की भर्ती कराने की योजना भी शामिल है। इनकी कार्यकारी और न्यायिक पदों के साथ-साथ पुलिस और सेना में “वफादार मुसलमानों” की भर्ती कराने की योजना है। दस्तावेज के अनुसार पीएफआई ने आरएसएस के खिलाफ भी योजना बनाई है। इसने आरएसएस को केवल “उच्च जाति वाले हिंदुओं” के कल्याण में रुचि रखने वाले संगठन के रूप में पेश करके “आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन” पैदा करने की योजना बनाई है। इसके लिए उन्होंने दस्तावेजों में पुख्ता प्लानिंग भी बनाई। जब्त किए गए दस्तावेजों के पेज नंबर 3 में 10% वाले फॉर्मूले का जिक्र किया गया है। पीएफआई को विश्वास है कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का केवल 10% भी इसके साथ जुड़ता है, तो भी पीएफआई ‘कायर बहुसंख्यक’ समुदाय को उसके घुटनों पर ला देगा और इस्लामी शासन की स्थापना करेगा।

उनसे जब्त दस्तावेजों के पेज नंबर 7 पर बड़े स्तर पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की बात कही गई है। इसमें लिखा है कि सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई के दौरान, “हमारे प्रशिक्षित पीएफआई कैडरों पर भरोसा करने के अलावा, हमें मित्र इस्लामी देशों से मदद की आवश्यकता होगी।” गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में, पीएफआई ने इस्लाम के ध्वजवाहक तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी देशों के साथ भी यह रिश्ता कायम करने के लिए प्रयास कर रहा है। जलालुद्दीन पहले सिमी से भी जुड़ा रहा है जो पी एफ आई का मूल संगठन है। इनकी गिरफ्तारी के बाद से बिहार पुलिस ‘भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल आतंकी मॉड्यूल’ का भंडाफोड़ करने का दावा कर रही है। आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में, बिहार पुलिस ने खुलासा किया कि जिसका बिहार पुलिस ने खुलासा किया है।

बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के साथ संबंध रखने वाले दो आरोपियों को पकड़ा गया है। फुलवारी शरीफ के अपर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि बुधवार देर रात झारखंड के सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज को गिरफ्तार किया गया। आरोपी पीएफआई से जुड़े हैं।’’ उन्होंने कहा कि जलालुद्दीन पहले स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़ा था। इनसे प्राप्त दस्तावेजों में लिखा है, “भारत को इस्लामिक देश बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है जो सभी पीएफआई नेताओं द्वारा बनाया गया है। इस लक्ष्य के लिए पीएफआई कैडरों, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय को मार्गदर्शन करने के लिए तैयार किया गया है।”

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जलालुद्दीन के मकान में स्थानीय लोगों को मार्शल आर्ट अथवा शारीरिक शिक्षा के नाम पर अस्त्र-शस्त्र का प्रशिक्षण देने एवं धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए उन्हें उकसाने की बात सामने आई है। यही बात उनसे प्राप्त दस्तावेजों में भी लिखी हुई है। पीएफआई दस्तावेज में लिखा है, “पार्टी सहित हमारे सभी फ्रंटल संगठनों को नए सदस्यों के विस्तार और भर्ती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हम अपने पीई विभाग में सदस्यों की भर्ती और ट्रेनिंग शुरू करेंगे, जिसमें उन्हें हमला करने और बचाव तकनीकों, तलवारों, छड़ों और अन्य हथियारों के इस्तेमाल पर ट्रेनिंग दी जाएगी।”

पटना एसएसपी डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लो द्वारा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से तुलना करने पर बवाल मच गया है। इस मामले में एसएसपी घिरते नजर आ रहे हैं। भाजपा ने इसपर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एसएसपी को हटाने की मांग की है। फुलवारीशरीफ में देशविरोधी गतिविधियों के अड्डे का खुलासा होने व दो संदिग्धों के पकड़े जाने के मामले में गुरुवार को एसएसपी मीडियाकर्मियों को जानकारी दे रहे थे। इसमें उन्होंने छापेमारी और गिरफ्तारी की जानकारी दी।

इसी दौरान उन्होंने मामले के अनुसंधान की जानकारी देते हुए कहा कि पीएफआई का मॉडल वैसा ही था, जैसे आरएसएस की शाखा का होता है। आरएसएस की शाखा ऑर्गेनाइज की जाती है और वहां लाठी की ट्रेनिंग होती है। वैसे ही ये पीएफआई फिजिकल ट्रेनिंग व फिजिकल एजुकेशन देने के नाम पर यूथ को प्रशिक्षण दे रहा था और अपने एजेंडे व प्रोपगैंडा के माध्यम से युवाओं का ब्रेनवाश कर रहे थे।​ बिहार की राजधानी पटना में पीएफआई की आड़ में बड़े आतंकी ट्रेनिंग सेंटर का खुलासा हुआ है। पुलिस ने छापेमारी में दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें पीएफआई की साल 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिश का भी खुलासा हुआ है। इसके लिए मुस्लिम युवाओं को हथियार चलाने, धार्मिक उन्माद फैलाने और हिंसा भड़काने की ट्रेनिंग दी जा रही थी।

( कल पढ़ें : कुख्यात ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया’ पर प्रतिबन्ध कब ? )

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