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विश्व को सच्चा धर्म समझाने के लिए संतों ने धार्मिक उत्थान का महत्त्वपूर्ण कार्य किया : पू सरसंघचालक मा. डॉ मोहन भागवत

नर्सी स्थित संत नामदेव गुरूद्वारे में डॉ मोहन जी भागवत ने लिया दर्शन

आज १० नवंबर, बुधवार को हिंगोली जिला स्थित संत नामदेव जी की जन्मभूमि नर्सी में पूजनीय सरसंघचालक का प्रवास हुआ। वे इस अवसर पर बोल रहें थे।

पू. सरसंघचालक ने आगे कहा कि, “भक्तिमार्ग का भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से बड़ा महत्व है। महाराष्ट्र में, अनेक संतों की परंपरा विद्यमान है। संत नामदेव ने सरल भाषा में लोगों को भक्ति का मार्ग बतलाया। उन्होंने वारकरी संप्रदाय का पताका पंजाब तक फहराया। इससे हिंदू समाज में, सामंजस्य और आत्मीयता दिखाई देती है। साधारण पारम्परिक चीजों में भी अध्यात्म और सामाजिक जागृति भारत देश में आज भी दिखती है। इसीलिए पंजाब के समाज ने नामदेव द्वारा दिखाये गए मार्ग का सहजरूप से स्वीकार किया। गुरुग्रंथ साहिब में नामदेव के ६१ दोहे विद्यमान है। श्री गुरुनानक एवं श्री गुरू गोविंदसिंह ने संत नामदेव को हमेशा ही सम्मान का स्थान दिया है। राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी ऐसी ही है और ‘एक जन, एक संघ’, इसी से मूलभूत साक्षात्कार होता है।”

नरसी स्थित श्री संत नामदेव के जन्मस्थान का, गुरूद्वारे का दर्शन और संत नामदेव के समाधि स्थल का दर्शन करके मैं धन्य हुआ, ऐसा पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा। इस अवसर पर अधिवक्ता संतोष कुटे ने प्रास्ताविक परिचय दिया। जिला संघचालक तेजकुमार झांझरी , सुखबीर सिंह, संदीप रासकर, संस्थान के अध्यक्ष व गुरुद्वारा प्रमुख इस अवसर पर उपस्थित थे।

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