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अनुपम, अथक समाजसेवक और पतितपावन मंदिर के प्रणेता सावरकर

सावरकर को कितना जानते हैं हम’ श्रृंखला – लेख ५

वीर सावरकर एक महान समाज सुधारक भी थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि सामाजिक एवं सार्वजनिक सुधार बराबरी का महत्त्व रखते हैं व एक -दूसरे के पूरक हैं। उनके समय में समाज बहुत -सी कुरीतियों और बेड़ियों के बंधनों में जकड़ा हुआ था। इस कारण हिन्दू समाज बहुत ही दुर्बल हो गया था। अपने भाषणों, लेखों व कृत्यों से इन्होंने समाज सुधार के निरंतर प्रयास किए। उनका समाज सुधार जीवन पर्यन्त चला। उनके सामाजिक उत्थान कार्यक्रम ना केवल हिन्दुओं के लिए बल्कि राष्ट्र को समर्पित होते थे। १९२४ से १९३७ का समय इनके जीवन का समाज सुधार को समर्पित काल रहा। सावरकरजी हिन्दू समाज में प्रचलित जाति-भेद एवं छुआछूत के घोर विरोधी थे। बम्बई का पतितपावन मंदिर इसका जीवन्त उदाहरण है, जो हिन्दू धर्म की प्रत्येक जाति के लोगों के लिए समान रूप से खुला है। पिछले सौ वर्षों में इन बन्धनों से किसी हद तक मुक्ति सावरकर के ही अथक प्रयासों का परिणाम है।


सावरकर के अनुसार हिन्दू समाज प्रमुखतः सात बेड़ियों में जकड़ा हुआ था -:


स्पर्शबंदी: निम्न जातियों का स्पर्श तक निषेध, अस्पृश्यता
रोटीबंदी: निम्न जातियों के साथ खानपान निषेध
बेटीबंदी: खास जातियों के संग विवाह संबंध निषेध
व्यवसायबंदी: कुछ निश्चित व्यवसाय निषेध
सिंधुबंदी: सागरपार यात्रा, व्यवसाय निषेध
वेदोक्तबंदी: वेद के कर्मकाण्डों का एक वर्ग को निषेध
शुद्धिबंदी: किसी को वापस हिन्दूकरण पर निषेध


वीर सावरकर ने इन सातों बंधनों से मुक्त समाज की रचना के लिए अपना जीवन होम कर दिया। सावरकर के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए भारत में निम्नलिखित संस्थाएँ कार्यरत हैं – :


नादब्रह्म (चिंचवड-पुणे) : रवींद्र-सावनी-वंदना घांगुर्डे द्वारा संचालित यह संगठन, रंगमंच पर सावरकर के साहित्य पर आधारित कई कार्यक्रम प्रस्तुत करता है।
वीर सावरकर फाउंडेशन (कलकता)
वीर सावरकर मित्र मंडळ
वीर सावरकर स्मृती केंद्र (वडोदरा)
समग्र सावरकर वाङ्ग्मय प्रकाशन समिति
सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान (मुंबई)
सावरकर रुग्ण सेवा मंडळ (लातूर)
स्वातंत्र्यवीर सावरकर गणेश मंडळ
स्वातंत्र्यवीर सावरकर मंडळ (निगडी-पुणे जिला)
स्वातंत्र्यवीर सावरकर साहित्य अभ्यास मंडळ (डोंबिवली-ठाणे जिला)
स्वातंत्र्यवीर सावरकर साहित्य अभ्यास मंडळ (मुंबई) — यह संस्था सावरकर साहित्य सम्मेलन का आयोजन करती है।

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