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अद्भुत रचनाकार और शब्दशोधक थे सावरकर

सावरकर को कितना जानते हैं हम’ श्रृंखला – लेख ६

वीर विनायक दामोदर सावरकर देश की वह विरले प्रतिभा थे जिन्होने अपनी रचनात्मकता से अपने जीवन को सार्थक और संसार को हर दॄष्टि से समृद्ध किया। उन्होने क्रांतिकारियों के लिए “१८५७ स्वातंत्र्य समर ‘ नामका गीता ही नहीं लिखी बल्कि नाटकों -कविताओं से देश का स्तुतिगान भी किया। इसके साथ ही न केवल अपनी भाषा को १५०० नए शब्द दिए अपितु अनुवाद को भी प्रामाणिक बनाया।


वीर विनायक दामोदर सावरकर ने 10,000 से अधिक पन्ने मराठी भाषा में तथा 1500 से अधिक पन्ने अंग्रेजी में मौलिक लेखन किया है। बहुत कम लेखकों ने इतना मौलिक लिखा है। उनकी “सागरा प्राण तळमळला”, “हे हिन्दु नृसिंहा प्रभो शिवाजी राजा”, “जयोस्तुते”, “तानाजीचा पोवाडा” आदि कविताएँ अत्यन्त लोकप्रिय हैं।

स्वातंत्र्यवीर सावरकर की 40 पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हैं, जो निम्नलिखित हैं-


अखण्ड सावधान असावे ; 1857 चे स्वातंत्र्यसमर ; अंदमानच्या अंधेरीतून ; अंधश्रद्धा भाग 1 ; अंधश्रद्धा भाग 2 ; संगीत उत्तरक्रिया ; संगीत उ:शाप ; ऐतिहासिक निवेदने ; काळे पाणी ; क्रांतिघोष ; गरमा गरम चिवडा ; गांधी आणि गोंधळ ; जात्युच्छेदक निबंध ; जोसेफ मॅझिनी ; तेजस्वी तारे ; प्राचीन अर्वाचीन महिला ; भारतीय इतिहासातील सहा सोनेरी पाने ; भाषा शुद्धी ; महाकाव्य कमला ; महाकाव्य गोमांतक ; माझी जन्मठेप ; माझ्या आठवणी – नाशिक ; माझ्या आठवणी – पूर्वपीठिका ; माझ्या आठवणी – भगूर ; मोपल्यांचे बंड ; रणशिंग ; लंडनची बातमीपत्रे ; विविध भाषणे ; विविध लेख ; विज्ञाननिष्ठ निबंध ; शत्रूच्या शिबिरात ; संन्यस्त खड्ग आणि बोधिवृक्ष ; सावरकरांची पत्रे ; सावरकरांच्या कविता ; स्फुट लेख ; हिंदुत्व ; हिंदुत्वाचे पंचप्राण ; हिंदुपदपादशाही ; हिंदुराष्ट्र दर्शन ; क्ष – किरणें
‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस – १८५७’ सावरकर द्वारा लिखित पुस्तक है, जिसमें उन्होंने खोजपूर्ण इतिहास लिख कर ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी । अधिकांश इतिहासकारों ने 1957 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम को एक सिपाही विद्रोह या अधिकतम भारतीय विद्रोह कहा था। दूसरी ओर भारतीय विश्लेषकों ने भी इसे तब तक एक योजनाबद्ध राजनीतिक एवं सैन्य आक्रमण कहा था, जो भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के ऊपर किया गया था।


इतिहास


१८५७चे स्वातंत्र्यसमर
भारतीय इतिहासातील सहा सोनेरी पाने
हिंदुपदपादशाही


कथा

सावरकरांच्या गोष्टी भाग – १
सावरकरांच्या गोष्टी भाग – २
उपन्यास
काळेपाणी
मोपल्यांचे बंड अर्थात्‌ मला काय त्याचे
आत्मचरित्र
माझी जन्मठेप
शत्रूच्या शिबिरात
अथांग (आत्मचरित्र पूर्वपीठिका)
हिन्दुत्ववाद
हिन्दुत्व
हिन्दुराष्ट्र दर्शन
हिन्दुत्वाचे पंचप्राण
लेखसंग्रह
मॅझिनीच्या आत्मचरित्राची प्रस्तावना – अनुवादित
गांधी गोंधळ
लंडनची बातमीपत्रे
गरमागरम चिवडा
तेजस्वी तारे
जात्युच्छेदक निबंध
विज्ञाननिष्ठ निबंध
स्फुट लेख
सावरकरांची राजकीय भाषणे
सावरकरांची सामाजिक भाषणे
नाटक
संगीत उ:शाप
संगीत संन्यस्त खड्‌ग
संगीत उत्तरक्रिया
बोधिसत्व- (अपूर्ण)
कविता
महाकाव्य
कमला
गोमांतक
विरहोच्छ्वास
सप्तर्षी
स्फुट काव्य


सावरकरांच्या कविता हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए सावरकर सन् 1906 से ही प्रयत्नशील थे। लन्दन स्थित भारत भवन (इंडिया हाउस) में संस्था ‘अभिनव भारत’ के कार्यकर्ता रात्रि को सोने के पहले स्वतंत्रता के चार सूत्रीय संकल्पों को दोहराते थे। उसमें चौथा सूत्र होता था ‘हिन्दी को राष्ट्रभाषा व देवनागरी को राष्ट्रलिपि घोषित करना’। अंडमान की सेल्यूलर जेल में रहते हुए उन्होंने बन्दियों को शिक्षित करने का काम तो किया ही, साथ ही साथ वहां हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु काफी प्रयास किया। 1911 में कारावास में राजबंदियों को कुछ रियायतें देना शुरू हुई, तो सावरकर जी ने उसका लाभ राजबन्दियों को राष्ट्रभाषा पढ़ाने में लिया। वे सभी राजबंदियों को हिंदी का शिक्षण लेने के लिए आग्रह करने लगे। हालांकि दक्षिण भारत के बंदियों ने इसका विरोध किया क्योंकि वे उर्दू और हिंदी को एक ही समझते थे। इसी तरह बंगाली और मराठी भाषी भी हिंदी के बारे में ज्यादा जानकारी न होने के कारण कहते थे कि इसमें व्याकरण और साहित्य नहीं के बराबर है। तब सावरकर ने इन सभी आक्षेपों के जवाब देते हुए हिन्दी साहित्य, व्याकरण, प्रौढ़ता, भविष्य और क्षमता को निर्देशित करते हुए हिन्दी को ही राष्ट्रभाषा के सर्वथा योग्य सिद्ध कर दिया। उन्होंने हिन्दी की कई पुस्तकें जेल में मंगवा ली और राजबंदियों की कक्षाएं शुरू कर दीं। उनका यह भी आग्रह था कि हिन्दी के साथ बांग्ला, मराठी और गुरुमुखी भी सीखी जाए। इस प्रयास के चलते अण्डमान की भयावह कारावास में ज्ञान का दीप जला और वहां हिंदी पुस्तकों का ग्रंथालय बन गया। कारावास में तब भाषा सीखने की होड़-सी लग गई थी। कुछ माह बाद राजबंदियों का पत्र-व्यवहार हिन्दी भाषा में ही होने लगा। तब अंग्रेजों को पत्रों की जांच के लिए हिंदीभाषी मुंशी रखना पड़ा।


मराठी पारिभाषिक शब्दावली में योगदान


भाषाशुद्धि का आग्रह धरकर सावरकर ने मराठी भाषा को अनेकों पारिभाषिक शब्द दिये, उनके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं –
: मराठी शब्द ( हिन्दी शब्द, अंग्रेज़ी शब्द )
दिनांक ( तारीख, डेट )
क्रमांक ( नंबर, नंबर )
बोलपट ( — , टॉकी )
नेपथ्य
वेशभूषा ( — , कॉश्च्युम )
दिग्दर्शक ( — , डायरेक्टर )
चित्रपट ( — , सिनेमा )
मध्यंतर ( — , इन्टर्व्हल )
उपस्थित ( हजर, प्रेसेन्ट )
प्रतिवृत्त ( — , रिपोर्ट )
नगरपालिका ( — , म्युन्सिपाल्टी )
महापालिका ( — , कॉर्पोरेशन )
महापौर ( — , मेयर )
पर्यवेक्षक ( — , सुपरवायझर )
विश्वस्त ( — , ट्रस्टी )
त्वर्य/त्वरित ( — , अर्जंट )
गणसंख्या ( — , कोरम )
स्तंभ ( — , कॉलम )
मूल्य ( — , किंमत )
शुल्क ( — , फी )
हुतात्मा ( शहीद, )
निर्बंध ( कायदा, लॉ )
शिरगणती ( खानेसुमारी, — )
विशेषांक ( खास अंक, — )
सार्वमत ( — , प्लेबिसाइट )
झरणी ( — , फाऊन्टनपेन )
नभोवाणी ( — , रेडिओ )
दूरदर्शन ( — , टेलिव्हिजन )
दूरध्वनी ( — , टेलिफोन )
ध्वनिक्षेपक ( — , लाउड स्पीकर )
विधिमंडळ ( — , असेम्ब्ली )
अर्थसंकल्प ( — , बजेट )
क्रीडांगण ( — , प्लेग्राउंड )
प्राचार्य ( — , प्रिन्सिपॉल )
मुख्याध्यापक ( — , प्रिन्सिपॉल )
प्राध्यापक ( — , प्रोफेसर )
परीक्षक ( — , एक्झामिनर )
शस्त्रसंधी ( — , सिसफायर )
टपाल ( — , पोस्ट )
तारण ( — , मॉर्गेज )
संचलन ( — , परेड )
गतिमान
नेतृत्व ( — , लिडरशीप )
सेवानिवृत्त ( — , रिटायर )
वेतन ( पगार, सॅलेरी )

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