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नहीं रहे संतूर के शिखर पुरुष पंडित शिव कुमार शर्मा

सुप्रसिद्ध भारतीय संगीतकार और संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा का निधन हो गया है। भारतीय शास्त्रीय संगीत को उनके खास अंदाज की वजह से अतंर्राष्ट्रीय पहचान मिली थी। पंडित शिव कुमार शर्मा ने फिल्मों में भी योगदान दिया था। संतूर वादक शिव कुमार शर्मा ने वाद्य यंत्र संतूर को विश्व विख्यात बनाने में अहम योगदान दिया। संतूर वाद्य यंत्र कभी कभी जम्मू-कश्मीर का एक अल्पज्ञात वाद्य था, लेकिन पंडित शर्मा के योगदान के संतूर को एक शास्त्रीय संगीत वाद्य यंत्रदर्जा दिया और इसे अन्य पारंपरिक और प्रसिद्ध वाद्ययंत्रों जैसे सितार और सरोद के साथ ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

शिवकुमार शर्मा संतूर के महारथी होने के साथ साथ एक अच्छे गायक भी हैं। एकमात्र इन्हें संतूर को लोकप्रिय शास्त्रीय वाद्य बनाने में पूरा श्रेय जाता है। इन्होंने संगीत साधना आरंभ करते समय कभी संतूर के विषय में सोचा भी नहीं था, इनके पिता ने ही निश्चय किया कि ये संतूर बजाया करें। इनका प्रथम एकल एल्बम १९६० में आया। १९६५ में इन्होंने निर्देशक वी शांताराम की नृत्य-संगीत के लिए प्रसिद्ध हिन्दी फिल्म झनक झनक पायल बाजे का संगीत दिया।

१९६७ में इन्होंने प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और पंडित बृजभूषण काबरा की संगत से एल्बम कॉल ऑफ द वैली बनाया, जो शास्त्रीय संगीत में बहुत ऊंचे स्थान पर गिना जाता है। इन्होंने पं. हरि प्रसाद चौरसिया के साथ कई हिन्दी फिल्मों में संगीत दिया है। फिल्म संगीत का श्रीगणेश १९८० में सिलसिला से हुआ था। इन्हें शिव-हरि नाम से प्रसिद्धि मिली। इनकी कुछ उल्लेखनीय फिल्मों में फासले (१९८५), चाँदनी (१९८९), लम्हे (१९९१), और डर (१९९३) हैं।

शिवकुमार शर्मा को पद्मश्री, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, जम्मू विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट, उस्ताद हाफिज अली खान पुरस्कार, महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार, आदि जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें प्राप्त हैं।

Himanshu shukla

Researcher [India-centric world]

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