Opinion

भीम – मीम एकता : हसीन सपनों की बेनूर हकीकत

 
 इन दिनों देश में “दलित मुस्लिम एकता का सिक्का ” बहुत उछाला जाता है और हिन्दुओं को निर्बल करने के लिए मुसलमानों द्वारा दलितों के प्रति प्रेम का शोर मचाया जाता है किन्तु सच्चाई यह है कि मुसलमानों ने १९३४ से आजतक दलितों का शोषण किया है , उनका मत -परिवर्तन का प्रयास किया है और प्रायः उनकी हत्या की है।रजाकार आंदोलन में दलित महिलाओं के सामूहिक बलात्कार- दलित पुरुषों की नृशंस हत्याओं का परिदृश्य ऐसा कि हैदराबाद की सड़कें मृतकों के शव से पट गयीं थी और महिलाओं तथा बच्चों के चीत्कारों से कान सुन्न हो गए थे। तब सामूहिक रूप से बल पूर्वक दलितों को मुसलमान बनाने की अनेक घटनाएं हुई थीं।दिल्ली में सराय काले खान में एक दलित द्वारा मुस्लिम युवती से विवाह पर दलित बस्ती पर हमले की घटना बहुत पुरानी नहीं है। सच तो यह है कि ऐसी घटनाएं रह-रहकर सामने आती ही रहती हैं, जिनमें पीड़ित दलित होते हैं और हमलावर मुस्लिम। यदि ऐसी घटनाओं में बंगाल में राजनीतिक हिंसा में मारे गए दलित हिंदुओं की संख्या भी जोड़ी जाए तो स्थिति की भयावहता और उजागर होती है।आज भी परिदृश्य बदला नहीं है। दलित-मुस्लिम एकता के ढोल पीटने वाले तथा भीम-मीम का खोखला नारा लगाने वाले दलित-वामपंथी-इस्लामी नेताओं की कोई कमी नहीं, लेकिन मझुवा कांड पर सब मौन हैं।पूर्णिया ( बिहार ) के मझुवा गांव में मुसलमानों ने ५० से अधिक दलितों के घरों को जला दिया। यह क्षेत्र  बायसी तहसील के तहत आता है। यहां से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के विधायक हैं और ७५ प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। आसपास बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों का एक बड़ा हिस्सा जमीनों पर कब्जे कर रहा है और पीढ़ियों से बसे हिंदुओं को जोर जबरदस्ती से उन इलाकों से निकाला जा रहा है। इससे पहले भी इस्लामिक तत्वों द्वारा दलितों पर हमले, उनकी स्त्रियों के अपमान और घरों को आग लगाने की अनेक घटनाएं हो चुकी हैं।पिछले दिनों एक दलित युवक की हत्या इसलिए कर दी गयी कि उसने मुस्लिम लड़की से विवाह किया तो एक दलित छात्रा को शकील ने जबरन जहर इसलिए पिलाया कि  उसका बलात्कार करने में वह विफल रहा।  इतना ही नहीं एक दलित लड़की से फेसबुक पर मित्रता करके उसको अपने शहर बुलाकर अपने घर ले जाने फिर घर के सभी लोगों से उसका परिचय कराने , उससे बलात्कार करने – उस युवती को मुसलमान बनाने – फिर उसको हलाला कराने को विवश करने और तलाक देकर घर से निकाल देने जैसी घटनाएं भी मुस्लिमो लड़कों द्वारा की जा रही हैं।    

  मूल कथा

मुसलमानों के लिए ‘भीम -मीम एकता ‘ एक राजनीतिक नारा है और ‘लवजेहाद‘ आज भी गैर-मुस्लिम लड़कियों के शोषण और उसके माध्यम से अपनी जनसंख्या बढ़ाने के लक्ष्य तक सीमित है। इस कौम को यह स्वीकार्य नहीं है कि कोई मुस्लिम लड़की किसी गैर- मुस्लिम लडके से प्रेम विवाह कर ले चाहे वह उनके पसंदीदा और बहुप्रचारित नारे ‘भीम और मीम एक हैं ‘ वाले भीम यानी दलित समुदाय का लड़का ही क्यों नहीं हो।वे मुस्लिम लड़की को नहीं  मारते ताकि उसके साथ कोई मुसलमान शादी करके उसको कौम में वापस ला सके लेकिन गैर मुस्लिम उस लडके की बर्बरतापूर्वक हत्या सरे बाज़ार कर देते हैं जिसने मुस्लिम लड़की से विवाह किया हो। इसकी पुष्टि करती कुछ घटनाएं इस प्रकार हैं -:

 “भीम -मीम एक हैं ‘ नारे की धज्जियाँ उड़ाते मुसलमानों ने दलित हिन्दू को मार डाला

तेलंगाना के हैदराबाद में कल देखने को मिला जिसमें दलित समुदाय के २५ वर्षीय बिल्लापुरम नागराजू  को सरे बाज़ार चाकू से गोदकर उसकी नवव्याहता पत्नी के सामने मार डाला गया। मारनेवाले मुसलमान थे , मृतक दलित हिन्दू  और हत्या कारण था उस दलित का अपने कॉलेज की मित्र मुस्लिम लड़की से आर्य समाज मंदिर में विवाह करना। सरे आम की गयी इस बर्बर कृत्य का स्पष्ट संकेत था कि कोई भी गैर मुस्लिम लड़का किसी मुस्लिम लड़की से विवाह की हिम्मत भविष्य में न करे।

हैदराबाद में कॉलेज के जमाने की एक मुस्लिम युवती से शादी करने पर एक युवक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। घटना में युवती के परिजनों का हाथ होने की बात सामने आई है। मृतक की पहचान २५ साल बिल्लापुरम नागराजू के रूप में हुई है। उसने २३  साल की सैयद सुल्ताना से दो माह पहले ही शादी की थी। नागराजू के परिजनों ने बताया कि दोनों की कॉलेज के जमाने से दोस्ती थी। युवक के एक रिश्तेदार ने आरोप लगाया कि चूंकि दोनों अलग-अलग समुदाय के थे, इसलिए लड़की के परिवार वालों ने नागराजू को मार डाला।हत्या बुधवार को रात करीब ९ बजे हैदराबाद के सरूरनगर तहसीलदार आफिस के पास की गयी । नागराजू को एक बाइक सवार ने चाकू घोंप दिया। पुलिस ने मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। ये सभी मुस्लिम लड़की के परिवार के हैं।

नागराजू (२५ वर्ष ) ने चार महीने पहले ३१  जनवरी को सैयद अश्रीन सुल्ताना उर्फ पल्लवी (२३ ) से प्रेम विवाह किया था। दोनों के परिवार इनकी शादी से खुश नहीं थे, इसीलिए ये दोनों अपने परिवार से अलग रहते थे। नागराजू के परिजन ने बताया कि दोनों कॉलेज के दिनों से एक-दूसरे से प्यार करते थे, दोनों ने पुराने शहर के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। मृतक के परिजन ने आरोप लगाया कि चूंकि नागराजू दलित हिंदू था और लड़की मुस्लिम थी इसलिए लड़की के परिवार ने लड़के की हत्या कर दी. उनके पूरे परिवार को गिरफ्तार करके सजा दी जाए।

घटना के बाद, इलाके में तनाव पैदा हो गया है और नागराज के परिवार ने नागराज की हत्या में उसकी पत्नी का परिवार शामिल होने का दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। नागराज ने सैयद अश्रीन सुल्ताना से ३१ जनवरी को उसके परिवार की इच्छा के विरुद्ध शादी की थी। नागराज के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि अशरीन सुल्ताना के परिवार ने लोगों ने नागराजू की हत्या इसलिए की क्योंकि वे अलग-अलग धर्म के थे और उन्होंने उसके परिवार की इच्छा के विरुद्ध  एक-दूसरे से शादी की थी।

तेलंगाना के विधायक राजा सिंह ने हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शुक्रवार को ट्विटर पर इस मुद्दे पर टिप्पणी की। पूनावाला ने कहा क‍ि अगर एक हिंदू पत्नी के मुस्लिम पति को उसके परिवार ने मार दिया होता तो हम जानते हैं कि अब तक क्या होगा! कांग्रेस, आप, टीएमसी, सपा इस्लामोफोबिया का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र पहुंच गए होंते । लेकिन जब से हिंदू मारे गए हैं और हैदराबाद में – अपराध धर्मनिरपेक्ष है? इसलिए धर्मनिरपेक्ष चुप।

 फेसबुक पर  दोस्ती , बलात्कार , मुस्लिम बनाने की कोशिश , हलाला फिर तलाक

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक दलित महिला ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक ने सोशल मीडिया के जरिए उससे दोस्ती कर उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके परिवार पर शादी के लिए जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. महिला की शिकायत पर युवक और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बरेली पुलिस का कहना है, ‘दलित महिला ने आरोप लगाया है कि आदमी ने उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया और उसके माता-पिता से ७  लाख रुपये लाने के लिए कहा, फिर १० अप्रैल को उसको घर से निकाल दिया. महिला ने उन पर जातिवादी टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवान ने सोमवार को कहा  कि पीलीभीत जिले के रहने वाले युवक ने करीब पांच साल पहले अपनी बहन के फेसबुक अकाउंट के जरिए महिला से दोस्ती की थी. उसने महिला से बातचीत शुरू की और बाद में अपना परिचय दिया, लेकिन उन्होंने बातचीत जारी रखी.एसएसपी रोहित सिंह सजवान के मुताबिक, आरोपी ने फिर उसे बरेली के एक मॉल में बुलाया, जहां से वह उसे अपने परिवार से मिलने के बहाने पीलीभीत ले गया, जहां उसक जहां उसके माता-पिता और बहन ने कथित तौर पर उसे एक कमरे में बंद कर दिया, महिला ने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति ने उसके साथ बलात्कार किया, जिसकी वीडियो रिकॉर.जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। एसएसपी रोहित सिंह सजवान का कहना है कि महिला पर जबरन धर्म परिवर्तन के बाद निकाह करने के लिए दबाव डाला गया, जब उसने ऐसा करने से इनकार किया तो उसे धमकी धमकी दी गई कि उसका वीडियो ऑनलाइन लीक कर दिया जाएगा, धर्म बदलने के बाद आखिरकार उनकी शादी सितंबर २०२०  में हो गई, लेकिन उसे तीन महीने तक एक गेस्ट हाउस एक गेस्ट हाउस में रखा गया था.
एसएसपी रोहित सिंह सजवान ने कहा कि महिला ने दावा किया कि वह इस बीच गर्भवती हो गई, लेकिन आदमी ने कथित तौर पर उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया. एसएसपी ने कह.एसएसपी ने कहा कि उसने महिला के माता-पिता से ७  लाख रुपये लेने का भी दबाव डाला और १०  अप्रैल को उस पर जातिवादी टिप्पणी करने के बाद उसे घर से निकाल दिया.आरोपी निकाह के दस्तावेज और फोटो भी अपने साथ ले गया

शाहिल ने दलित छात्रा के रेप की कोशिश की फिर उसे बलपूर्वक जहर पिलाया

उत्‍तर प्रदेश के सहारनपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक नाबालिग दलित छात्रा को पहले अगवा कर एक होटल में ले जाया गया. वहां उनके साथ रेप करने की कोशिश (Rape Attempt) की गई. नापाक मंसूबे में विफल रहने पर आरोपी युवक ने दलित छात्रा (Dalit Minor Girl Student) को जबरन जहर पिला दिया और उसे बाद उन्‍हें जंगल में फेंक दिया. परिजनों ने अपनी बिटिया की तलाश कर उन्‍हें बेसुध हालत में अस्‍पताल में भर्ती कराया, जहां नाबालिग छात्रा की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि पीड़िता के परिजनों की ओर से शुरुआत में इस बाबत पुलिस में तहरीर नहीं दी गई थी. बाद में पुलिस को लिखित आवेदन दिया गया. आरोपी मुस्लिम समुदाय का युवक नाबालिग छात्रा के ही गांव का रहने वाला है.
दलित छात्रा समीप के गांव में कक्षा 9 की छात्रा थी. छात्रा की उम्र मात्र 15 साल थी. नाबालिग छात्रा के भाई ने बताया कि जब उसकी बहन स्कूल की छुट्टी होने के बाद घर नहीं लौटी तो उन्होंने उसकी तलाश की. बीजोपुरा गांव के जंगल में उसे तलाशा गया तो वह बेहोश अवस्‍था में मिली. इसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां पर छात्रा होश में आई और उसने आपबीती सुनाई. छात्रा ने बताया कि उसके गांव का ही शाहिल नाम का युवक उसे बहला फुसलाकर सहारनपुर के एक होटल में ले गया था. यहां पर उसके साथ साहिल ने दुष्कर्म का प्रयास किया. उसने विरोध किया तो उसे जहर पिला दिया गया. इसके बाद युवक उसे कार में डालकर गांव के जंगल में फेंक दिया.

भारतीय प्रशासनिक सेवा के सपने देखता दलित राहुल को मुस्लिम युवकों ने लोहे के रॉड से पीट -पीटकर मार डाला  

११ अक्टूबर २०२० को दिल्ली के आदर्श नगर में राहुल नामक दलित लडके की जहांगीर पुरी के मुसलामानों ने पीट -पीट कर हत्या कर दी क्योंकि वह एक मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था और दोनों विवाह भी करना चाहते थे। अट्ठारह वर्षीय राहुल ओपन स्कूल से बीए की पढ़ाई कर रहा था और वो अपने घर में ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था तथा कुछ  क्लास लेने भी जाता था। सात अक्तूबर २०२०  की शाम सात बजे के करीब उसे कुछ युवकों ने इतनी बुरी तरह से पीटा कि घर लौटने के कुछ घंटे बाद ही उसने दम तोड़ दिया। राहुल की अपने घर से करीब एक किलोमीटर दूर जहांगीरपुरी की झुग्गी में रहने वाली एक मुसलमान लड़की से दोस्ती थी। जिन युवकों ने उस पर हमला किया वो उस लड़की के भाई और उनके दोस्त थे। पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें से तीन नाबालिग हैं।

राहुल के पिता संजय कुमार ने सात अक्तूबर के घटनाक्रम के बारे में बताते हुए बीबीसी से कहा, “मैं और पत्नी दोनों काम पर बाहर थे. मेरी बेटी ने फोन करके बताया था कि भाई की तबियत खराब हो रही है आप जल्द घर आ जाइए। उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे हैं।  मैंने कहा कि आप उसे डॉक्टर को दिखाओ तब तक मैं आता हूं। ” संजय कहते हैं, “बाद में मुझे पता चला कि उसे फोन करके बुलाया गया था।  उससे कहा गया था कि ट्यूशन के लिए बात करनी है, इस बहाने उसे बुलाकर बाहर दूसरी गली में ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई। ” वो बताते हैं, “राहुल घर आ गया था, हमें लगा कि हल्की-फुल्की तबियत ख़राब है, डॉक्टर को दिखाकर सब ठीक हो जाएगा. लेकिन उसकी तबियत खराब होती चली गई, जब हम उसे अस्पताल लेकर गए तो उसकी मौत हो गई। “वे  बताते हैं, “हमें बताया गया है कि सात-आठ लोगों ने उसे बुरी तरह पीटा, लेकिन पुलिस ने अभी पांच ही लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि अगर इस घटना में और लोग भी शामिल होंगे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.”

राहुल के पिता टैक्सी ड्राइवर हैं और मां भी एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती हैं।  उसके पिता कहते हैं, “हमारा बेटा बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था. वो सिविल सेवा की तैयारी करना चाहता था। जब हम उससे कहत थे कि हम उस पर जितना जरूरी होगा पैसा खर्च करेंगे तो वो हमेशा ये ही कहा करता था कि वो खुद ही अपना खर्च उठाएगा। “घर में कोचिंग शुरू करने से पहले राहुल घर के पास ही एक एनजीओ में अंग्रेज़ी की क्लास लेने जाता था. उस लड़की से उसकी दोस्ती यहीं हुई थी।  वो भी यहां क्लास लेने आती थी। राहुल के पिता कहते हैं, “हमें उसकी दोस्ती के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, और अगर दोस्ती थी भी तो इसमें ऐसा क्या था कि हमारे बेटे की पीट-पीट कर हत्या ही कर दी। अगर उन्हें इससे नाराज़गी थी तो हमारे घर आते और इस बारे में बात करते.”

दलित युवक खेतराम को सात मुसलमानों ने खेत में तब तक क्रूरता से पीटा जब तक वह मर नहीं गया  

जनसत्ता में २५ जुलाई २०१८ को प्रकाशित समाचार के अनुसार राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। युवक खेतराम भीम का कथित तौर पर एक मुस्लिम युवती से प्रेम संबंध था। पुलिस ने इस मामले में दो मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया है। दलित युवक खेतराम भीम (२२ ) एक मुस्लिम युवती से प्रेम करता था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लड़की पक्ष के गुस्साए परिजनों ने खेतराम की पीट-पीट कर हत्या कर दी। पीड़ित युवक महबूब खान के घर में काम करता था। खेतराम का कथित तौर पर महबूब के परिवार की एक लड़की से अफेयर चल रहा था, जिसकी भनक युवती के परिजनों को लग गई थी। तराम के भाई हरिराम ने बताया कि सद्दाम खान और हयात खान नामक दो शख्स ने खेतराम को खेत में बुलाया था, जहां पहले से ही सात लोग उसका इंतजार कर रहे थे। उनलोगों ने कथित तौर पर खेतराम के दोनों हाथ बांध दिए और तब तक निर्ममता से पीटते रहे जब तक कि उसकी मौत नहीं हो गई। हत्या के बाद खेतराम के शव को घटनास्थल से कुछ दूर ले जाकर फेंक दिया गया था। युवक के शव को तीन दिन के बाद बरामद किया गया था।

खेतराम का शव बरामद होने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। इसमें दलित युवक की निर्मम तरीके से पिटाई की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों ने उसका गला दबाने की भी कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में दो युवाओं को गिरफ्तार किया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है, ताकि हत्या में शामिल अन्य लोगों की पहचान सुनिश्चित की जा सके। खेतराम की पीट-पीट कर हत्या करने की घटना ऐसे समय सामने आई है जब देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) के मामले सामने आ रहे हैं।

  मुस्लिमों ने ऑनर किलिंग की  

कर्नाटक के विजयपुरा जिले में २४ जून २०२१  को  एक मुस्लिम परिवार ने अपनी बेटी और एक दलित युवक की कथित तौर पर पीट-पीट कर इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उनके बीच प्रेम संबंध थे। विजयपुरा के पुलिस अधीक्षक अनुपम अग्रवाल ने बताया कि लड़की के पिता और उसके भाई समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक व्यक्ति फरार है। जानकारी के मुताबिक यह घटना मंगलवार को विजयपुरा के देवरा हिप्पारागी तालुक के सालादाहल्ली गांव में हुई जिसमें १९ वर्षीय बसवराजू और १६  वर्षीय दावालाबी पर हमला हुआ।  पुलिस ने बताया कि मंगलवार दोपहर लड़का-लड़की एक खेत में थे तभी लड़की का पिता और भाई, तीन अन्य लोगों के साथ वहां पहुंच गए और दोनों पर पत्थर और लाठियों से हमला कर दिया।  उनकी हत्या के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचा और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। बुधवार को इस मामले में दो लोगों को और फिर गुरुवार अन्य दो लोगों की गिरफ़्तारी हुई. पुलिस ने कहा कि दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।

 मुस्लिमों की भीड़ ने दलितों के ५० से अधिक घरों को जलाया

बिहार के पूर्णिया जिले के मझुवा गांव में 19 मई२०२१ की रात महादलितों पर हमला देश को झकझोरने वाला साबित होना चाहिए था। हिंदू समाज के जिस वर्ग को दलितों से भी अधिक पिछड़ा और वंचित मान कर महादलित का दर्जा दिया गया, उनपर मुस्लिम समुदाय की भीड़ ने हमला किया। इस हमले में ५० से ज्यादा घर जला दिए गए और एक व्यक्ति को पीट-पीट कर मार डाला गया। हमेशा की तरह इस हमले के पीछे भी जमीन-जायदाद का मामला बताया गया। कुछ नेताओं का घटनास्थल पर जाना हुआ और बस। दलितों का दर्द भी अब सेक्युलर पाखंड और निर्मम संवेदनहीनता का शिकार हो गया है। यदि यही घटना किसी गैर हिंदू गांव में घटी होती तो हम देखते कि दलित नेताओं की भीड़ वहां उमड़ती। सभी विपक्षी नेता वहां मातमपुर्सी के लिए एकत्र होते, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के र्मािमक शब्दों में रिर्पोंिटग करने वाले वहीं खूंटा गाड़ कर रनिंग कमेंट्री कर रहे होते। सभी एक स्वर में नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे होते सो अलग, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ।

हिंदुस्तान में हिंदू के नाते जीवन यापन करना आज भी बहुधा त्रासदी भरा होता है। कश्मीर से केरल और इस्लामिस्ट-माओवादी कम्युनिस्ट आतंकियों के प्रभाव वाले इलाकों में रह रहे हिंदुओं से यह बात पूछी जा सकती है। यदि महादलित मुस्लिम होते और उन पर अत्याचार हुए होते तो क्या ऐसा ही सन्नाटा पसरा रहता? मझुवा गांव बायसी तहसील के तहत आता है। यहां से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के विधायक हैं और ७५ प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। आसपास बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों का एक बड़ा हिस्सा जमीनों पर कब्जे कर रहा है और पीढ़ियों से बसे हिंदुओं को जोर जबरदस्ती से उन इलाकों से निकाला जा रहा है। इससे पहले भी इस्लामिक तत्वों द्वारा दलितों पर हमले, उनकी स्त्रियों के अपमान और घरों को आग लगाने की अनेक घटनाएं हो चुकी हैं।

दिल्ली में सराय काले खान में एक दलित द्वारा मुस्लिम युवती से विवाह पर दलित बस्ती पर हमले की घटना बहुत पुरानी नहीं है। सच तो यह है कि ऐसी घटनाएं रह-रहकर सामने आती ही रहती हैं, जिनमें पीड़ित दलित होते हैं और हमलावर मुस्लिम। यदि ऐसी घटनाओं में बंगाल में राजनीतिक हिंसा में मारे गए दलित हिंदुओं की संख्या भी जोड़ी जाए तो स्थिति की भयावहता और उजागर होती है। हालांकि दलित-मुस्लिम एकता के ढोल पीटने वाले तथा भीम-मीम का खोखला नारा लगाने वाले दलित-वामपंथी-इस्लामी नेताओं की कोई कमी नहीं, लेकिन मझुवा कांड पर सब मौन हैं।

हिंदुओं को और अधिक तोड़ने एवं कमजोर करने के सुनियोजित प्रयास

हिंदुओं की कमजोरियों, उनकी सामाजिक विखंडन की स्थिति का लाभ उठाते हुए स्वतंत्रता से पहले से ही दलितों को इस्लामी ताकतों से जोड़ कर हिंदुओं को और अधिक तोड़ने एवं कमजोर करने के सुनियोजित प्रयास चल रहे हैं। सभी इससे तो अवगत हैं कि पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल को मुस्लिम लीग में पहले किस तरह महत्व दिया गया और यहां तक पाकिस्तान का प्रथम कानून एवं श्रम मंत्री बनाया गया, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिन्ना के मरते ही उन्हेंं हाशिये पर धकेल दिया गया। हताश-निराश मंडल भारत आ गए और दलितों के प्रति इस्लामी राजनीति का कच्चा-चिट्ठा खोला। इसके बावजूद देश में दलित-मुस्लिम एका का स्वांग जारी रहा। आजादी के बाद कुख्यात तस्कर हाजी मस्तान की अध्यक्षता में अखिल भारतीय दलित मुस्लिम महासंघ की स्थापना हुई, जिसमें बाद में फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार भी शामिल हुए।

मझुवा गांव की घटना पर दलित नेताओं ने मौन साधना बेहतर समझा

ओवैसी की मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन में दलितों के लिए विशेष अभियान सुविचारित ढंग से चलता आ रहा है। अनेक दलित नेता हिंदू तोड़ो-दलित जोड़ो के कुटिल षड़यंत्र के अंतर्गत हिंदू आस्था पर आघात करके अपनी कथित दलित आग्नेयता का आत्मघाती प्रदर्शन करते हैं। वस्तुत: यही वह वर्ग है जो मुस्लिमों द्वारा दलितों पर हमलों को दबाता है, उन पर चुप्पी साधे रहता है और कभी भी न तो घटनास्थल का दौरा करता है और न ही कार्रवाई की मांग करता है। यह तथ्य है कि मझुवा गांव की घटना पर दलित नेताओं ने मौन साधना ही बेहतर समझा।

आंबेडकर ने इस्लामिक संगठनों के प्रलोभन ठुकरा कर मुस्लिम होने के बजाय बौद्ध मत स्वीकार किया

इस्लामी पाकिस्तान और हिंदुओं के प्रति कुटिल मानसिकता देखकर ही डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस्लामिक संगठनों के तमाम प्रलोभन ठुकरा कर मुस्लिम होने के बजाय बौद्ध मत अपनाना स्वीकार किया। दुर्भाग्य से जातिगत सोच और संकीर्ण राजनीति के कारण हिंदू समाज भी इस भयानक खतरे के प्रति सजग नहीं हुआ है। आज भी दलितों पर हमलों के समय हिंदू-संत महात्मा चुप्पी साध बैठते हैं। उनके बड़े मंदिरों के न्यास विभिन्न कारणों से सरकारी कोष में करोड़ों रुपये का सहयोग करते हैं, लेकिन दलितों की सहायता के लिए उनमें कोई उत्साह नहीं दिखता। दलितों पर जातिगत वैमनस्य के कारण भेदभाव, आक्रमण कम नहीं हुए हैं। पूर्णिया में केवल विश्व हिंदू परिषद् के कार्यकर्ता बेघर हुए दलितों की सहायता के लिए पहुंचे, लेकिन क्या इतना ही पर्याप्त था? दलित सिर्फ आंकड़ा भर बना दिए जाएं। उनकी सहायता केवल तब की जाए, जब हिंदू समाज टूटने का खतरा हो तो यह दिखावा और दुखद होगा।

 दलित समाज हिंदुओं की रक्षक भुजा है

दलित समाज हिंदुओं की रक्षक भुजा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री गुरुजी गोलवलकर ने ‘तू मैं एक रक्त का’ संदेश क्यों दिया? क्योंकि उनका मानना था कि हिंदुओं में जातिगत विद्वेष और भेदभाव राष्ट्र को तोड़ने वाला सिद्ध होगा। हम एक रक्त, एक समाज, एक धर्मीय, एक हिंदू जाति वाले हैं। इसके अलावा कुछ नहीं। यदि आज भी हम नहीं चेते और दलितों को अपने घर में अपने रक्त बंधु का स्नेह और समानता नहीं दी तो फिर ईश्वर भी हालात नहीं सुधार पाएगा।

सन्दर्भ

https://www.abplive.com/news/india/exclusive-i-will-not-forgive-my-brother-will-stay-with-my-in-laws-till-my-last-breath-says-sultana-after-husband-raju-s-murder-2117459

https://www.msn.com/en-in/news/other/dalit-man-murdered-in-full-public-view-by-in-laws-for-marrying-upper-caste-muslim-woman/ar-AAWYHfq?ocid=msedgdhp&pc=U531&cvid=2e110ab97785407aae0b3ca164979ec0

रजाकारों के अत्याचार की कथा https://m.facebook.com/arya.samaj/photos/a.402585193097619/3695982150424557/?type=3


दलित लडके की आदर्शनगर दिल्ली में क्रूर हत्या https://www.bbc.com/hindi/india-54498991


राजस्‍थान: मुस्लिम लड़की से अफेयर था, उसके घरवालों ने दलित युवक को पीट-पीटकर मार डाला https://www.jansatta.com/rajya/rajasthan-dalit-youth-beaten-to-death-over-love-affair-with-a-muslim-girl/720478/


दलित महिला से रेप और उसका जबरन धर्म- परिवर्तन aajtak.in/crime/news/story/up-bareilly-rape-forced-conversion-and-abortion-dalit-woman-muslim-youth


 दलित युवक और मुस्लिम लड़की की हत्या, चार लोग गिरफ्तार https://www.abplive.com/news/india/dalit-youth-and-muslim-girl-murdered-for-false-pride-in-karnataka-1931362


दलित-मुस्लिम एकता का पाखंड:https://www.jagran.com/editorial/apnibaat-hypocrisy-of-dalit-muslim-unity-if-maha-dalits-of-purnia-became-muslims-and-they-were-tortured-would-same-silence-prevail-21687361.html

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button