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देश की सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति बनीं ‘नीलकंठ सम्मान विभूषित’ द्रौपदी मुर्मू

राजेश झा

देश की १५ वीं राष्ट्रपति चुनी गयी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू इस पद पर पहुंचनेवाली अब तक की सबसे कम उम्र की प्रत्याशी हैं। राष्ट्रपति चुने जाने से पूर्व वे झारखण्ड की राज्यपाल थीं। उन्होने अपने प्रतिद्वंद्वी यशवंत सिन्हा को लगभग ३ लाख मतों से पराजित किया। द्रौपदी मुरमू को २००७ में सर्वश्रेष्ठ विधायक चुनकर उड़ीशा विधानसभा ने ‘नीलकंठ पुरस्कार ‘ से विभूषित किया था। वनवासी श्रीमती मुर्मू २५ जुलाई को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगीं। ओडिशा के जनजाति-बहुल जिले मयूरभंज के एक सुदूर गांव में एक जनजातीय परिवार में जन्मी द्रौपदी राजनीति में आने से पहले एक सामान्य क्लर्क और शिक्षिका के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वे पूर्व में ओडिशा सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। द्रौपदी मुर्मू के परिवार में उनकी पुत्री इतिश्री मुर्मू (बैंक कर्मचारी) और दामाद गणेश हेम्ब्रम हैं जोकि एक रग्बी खिलाड़ी हैं।

श्रीमती मुर्मू ने वर्ष १९९७ में भारतीय जनता पार्टी के साथ अपने राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी। ओडिशा के राइरांगपुर जिले की पार्षद बनीं और फिर भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष। वे दो बार राज्य विधानसभा में बतौर बीजेपी विधायक चुनी गयीं और राज्य सरकार में बतौर मंत्री भी कार्य किया। उन्हें ओडिशा विधानसभा में सर्वश्रेष्ठ विधायक का ‘नीलकंठ पुरस्कार ‘ भी प्राप्त हुआ था।द्रौपदी मुर्मू को वर्ष २००७ में ओडिशा विधान सभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक के रूप में नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनकी शुद्ध संपत्ति₹ ४ .८ लाख रूपये हैं। उनके पास कुल सम्पत्ति ९ .४५ लाख रूपये तथा ऋण दायित्व ४ .६५ लाख रूपये है।

द्रौपदी मुर्मू का निजी जीवन संघर्ष और दुखों से भरा रहा लेकिन सार्वजनिक जीवन में वे अनगिनत ऊंचाइयां छूती रहीं। पति और दो-दो नौजवान पुत्रों को खोने के बावजूद वे समाजसेवा में डटी रहीं। झारखंड की पहली महिला राज्यपाल और किसी भी भारतीय प्रदेश की पहली जनजातीय महिला राज्यपाल बनकर उन्होनें कीर्तिमान स्थापित किया। द्रौपदी मुर्मू झारखंड राज्य के राज्यपाल का पद संभालने वाली पहली महिला हैं ।वे किसी भी भारतीय राज्य की पूर्णकालिक राज्यपाल बनने वाली पहली जनजातीय महिला भी हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम २०१५ द्रौपदी मुर्मू को झारखंड राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया। २००९ वे राइरांगपुर से भाजपा के टिकट पर दुबारा विधायक निर्वाचित हुईं। २००६ श्रीमती मुर्मू भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष बनीं। २००२ द्रौपदी मुर्मू को ओडिशा सरकार में मत्स्य एवं पशुपालन विभाग में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया। २००० राइरांगपुर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक चुनी गयीं और नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली तत्कालीन बीजद-भाजपा सरकार में स्वतंत्र प्रभार की राज्य मंत्री भी नियुक्त हुईं। उन्होने १९९४ में अरबिंदो इन्टीग्राल एजुकेशन सेंटर राइरांगपुर ओडिशा में बतौर शिक्षक कार्य करना शुरू किया। १९८३ में ओडिशा सरकार के अधीन सिंचाई विभाग में बतौर कनिष्ठ लिपिक कार्य करना आरंभ किया। १९७९ में द्रौपदी मुर्मू ने रमा देवी महिला विश्वविद्यालय ओडिशा से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

उनके पिताजी का नाम बिरांची नारायण टुडू है। श्याम चरण मुर्मू के साथ द्रौपदी मुर्मू की शादी हुई थी, जिनसे इन्हे तीन संतानें हुईं , जिनमें दो बेटे थे और एक बेटी थी। हालांकि इनका व्यक्तिगत जीवन ज्यादा सुखमय नहीं था, क्योंकि इनके पति और इनके दोनों बेटे अब इस दुनिया में नहीं है। इनकी बेटी ही अब जिंदा है जिसका नाम इतिश्री है, जिसकी शादी रग्बी खिलाड़ी गणेश हेम्ब्रम के साथ हुई है ।

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