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वे पन्द्रह दिन…/08 अगस्त,1947

स्वाधीनता का अमृत महोत्सव

मुम्बई के दादर स्थित ‘सावरकर सदन’ में भी थोड़ी व्यस्तता चल रही है. तात्याराव यानी वीर सावरकर अगले कुछ दिनों के लिए दिल्ली जाने वाले हैं, और वह भी हवाई जहाज से. सावरकर जी की यह पहली ही विमान यात्रा है. लेकिन उन्हें इसकी कोई उत्सुकता नहीं है, उनका मन कुछ खिन्न अवस्था में है. ‘खंडित हिन्दुस्तान’ की कल्पना भी उन्हें सहन नहीं हो रही है. अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए उन्होंने अपने जीवन को होम कर दिया, अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया, वह अखंड हिन्दुस्तान के लिए…! लेकिन काँग्रेस के दीन-हीन, कमज़ोर और लाचार नेतृत्व ने विभाजन स्वीकार कर लिया. इस बात का तात्याराव को बहुत कष्ट हो रहा है. इस सबके बीच पश्चिमी और पूर्वी भारत के क्षेत्रों से हिंदुओं और सिखों के नरसंहार के समाचार, लाखों की संख्या में हिंदुओं का विस्थापन, यह सब उनके लिए बहुत ही भयानक है.

इसीलिए इन सारी बातों पर चर्चा और विचार करने के लिए हिन्दू महासभा की एक आवश्यक राष्ट्रीय बैठक कल से दिल्ली में आयोजित है. देश के सभी प्रमुख हिन्दू नेता इस बैठक के लिए दिल्ली में एकत्रित होने जा रहे हैं. सावरकर जी को अपेक्षा है कि इस बैठक से निश्चित ही कुछ अच्छा निर्णय निकलकर आएगा. उनका हवाई जहाज सुबह ग्यारह बजे निकलने वाला है. दादर से जुहू कोई खास दूरी पर नहीं है, इसलिए उन्हें रवाना होने में अभी थोड़ा समय बाकी है.

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दख्खन का हैदराबाद… निजामशाही की राजधानी हैदराबाद. आज सुबह से ही शहर का वातावरण जरा तनावग्रस्त है. सुबह-सुबह ही उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रावासों से 300 हिन्दू लड़के अपने प्राण बचाकर भाग चुके हैं, इस बात से रजाकार बेहद क्रोधित हैं. इसका बदला लेने के लिए शहर में स्थित विभिन्न हिन्दू व्यापारियों पर उन्होंने हमले शुरू कर दिए. उधर वारंगल से आने वाली ख़बरें और भी चिंताजनक थीं. समूचे वारंगल जिले में हिन्दू नेताओं के मकानों पर मुस्लिम गुंडों द्वारा पथराव किया जा रहा है. हिंदुओं की दुकानें-मकान लूटे और जलाए जा रहे हैं. इसी को देखते हुए दोपहर में हैदराबाद के एक बड़े व्यापारी के घर शहर के कई हिन्दू व्यापारी एकत्रित हुए हैं. उन्होंने वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन और जवाहरलाल नेहरू को भेजने के लिए एक लंबा-चौड़ा टेलीग्राम तैयार किया… –

Formorethanamonth,Muslimgoondas,militaryandpolicereignofterror,loot, incendiarism there and murder are prevailing. There is no protection to non Muslims life, property and honour. Non Muslims are forcibly deprived of and penalised even for the most elementary self-defence preparations, whereas Muslims are openly allowed and even supplied with arms. The police act as spectators when and where Muslims are strong, but become active and shoot mercilessly when Hindus gather for self-defence.”

सन्दर्भ :- (Indian Daily Mail / Singapore / 9th August, 1947)

भारत देश के बीचोंबीच स्थित निजामशाही के इस हैदराबाद रियासत में हिन्दू सुरक्षित नहीं हैं. ऐसा लगता मानो उनका कोई माई-बाप नहीं है.

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आठ अगस्त का दिन ढलने के करीब है. कलकत्ता अभी भी धधक रहा है. हैदराबाद, वारंगल और निजामशाही के अन्य गांवों में हिंदुओं के मकानों और दुकानों पर मुस्लिम गुंडों के हमले जारी हैं. उधर दिल्ली के हिन्दू महासभा भवन में देश भर के नेता स्वातंत्र्यवीर सावरकर के साथ सलाह-मशविरा कर रहे हैं. अभी-अभी तात्याराव और पंडित मदनमोहन मालवीय की एक लंबी बैठक समाप्त हुई है.

उधर, सुदूर पूर्वी महाराष्ट्र के अकोला शहर में विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र के नेताओं में ‘अकोला संधि’ हो गई है. इस संधि के अनुसार संयुक्त महाराष्ट्र के दो उप-प्रांत रहेंगे, ‘पश्चिम महाराष्ट्र’ और ‘महाविदर्भ’. इन दोनों ही उप-प्रान्तों के लिए अलग स्वतन्त्र विधानसभा, मंत्रिमंडल और उच्च न्यायालय रहेंगे. परन्तु इस सम्पूर्ण प्रांत के लिए एक ही गवर्नर एवं एक ही लोकसेवा आयोग रहेगा, ऐसा तय किया गया है. इसी कारण जैसे-जैसे रात गहराती जा रही है, अकोला में मराठी नेतृत्व की मेजबानी अपने पूरे रंग में है.

उधर, कराची के अपने अस्थायी निवास में बैरिस्टर मोहम्मद अली जिन्ना आगामी 11 अगस्त को पाकिस्तान की संसद में दिए जाने वाले अपने भाषण की तैयारी करके उठे ही हैं… अब उनके सोने का वक्त हो चला है. गांधी जी कलकत्ता जाने वाली गाड़ी में बैठ चुके हैं. बाहर हल्की बारिश हो रही है. गांधी जी का डिब्बा एक-दो स्थानों से टपक रहा है. ट्रेन की खिड़की से आने वाली हवा ठण्डी लग रही है, इसलिए मनु ने खिड़की बन्द कर दी है.

दिल्ली के वाइसरॉय हाउस की लाइब्रेरी में अभी भी लाईट जल रही है. लॉर्ड माउंटबेटन महागोनी की अपनी विशाल टेबल पर आज दिन भर की रिपोर्ट, लन्दन में भारत के सचिव के लिए लिखकर रख रहे हैं. हमेशा तो वे डिक्टेशन देते हैं, परन्तु आज उनके पास इसके लिए समय ही नहीं. अब कल उनका सेक्रटरी इस रिपोर्ट को टाईप करके लन्दन भेजेगा.

आठ अगस्त शुक्रवार का दिन अब समाप्त होने को है. इस अखंड भारत की एक विशाल जनसंख्या अभी भी जाग ही रही है. सिंध, पेशावर का पर्वतीय इलाका, पंजाब, बंगाल, तथा निजामशाही के एक बड़े भूभाग में लाखों हिंदुओं की आंखों से नींद कोसों दूर है. ठीक अगले शुक्रवार को इस अखंड भारत के तीन टुकड़े होने जा रहे हैं और दो देश आकार ग्रहण करने वाले हैं….!

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