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वे पन्द्रह दिन…/13अगस्त,1947

स्वाधीनता का अमृत महोत्सव

मुंबई… जुहू हवाई अड्डा.

टाटा एयर सर्विसेज के काउंटर पर आठ-दस महिलाएं खड़ी हैं. सभी अनुशासित हैं और उनके चेहरों पर जबरदस्त आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है. यह सभी ‘राष्ट्र सेविका समिति’ की सेविकाएं हैं.

इनकी प्रमुख संचालिका यानी लक्ष्मीबाई केलकर, अर्थात् ‘मौसी जी’, कराची जाने वाली हैं. कराची में जारी अराजकता एवं अव्यवस्था के माहौल में हैदराबाद (सिंध) की एक सेविका ने उनको एक पत्र भेजा है. उस सेविका का नाम है जेठी देवानी. देवानी परिवार सिंध का एक साधारण परिवार है, जो संघ से जुड़ा हुआ है.

जेठी देवानी का पत्र आने के बाद मौसी जी से रहा नहीं गया. सिंध क्षेत्र की सेविकाओं की मदद के लिए तत्काल वहां जाने का निश्चय उन्होंने किया. राष्ट्र सेविका समिति का गठन हुए केवल ग्यारह वर्ष ही हुए हैं. परन्तु समिति का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. यहां तक कि सिंध, पंजाब और बंगाल जैसे सीमावर्ती प्रान्तों में भी राष्ट्र सेविका समिति का नाम और काम पहुंच चुका है.

कल कराची में कायदे आज़म जिन्ना, पाकिस्तान के राष्ट्र प्रमुख की शपथ लेने वाले हैं. वहां पर कल चारों तरफ स्वतंत्रता दिवस के समारोह मनाए जा रहे होंगे. परन्तु फिर भी वहां जाना आवश्यक है. इसीलिए मौसी जी, अपनी एक अन्य सहयोगी वेणुताई कलमकर के साथ कराची जाने के लिए हवाई अड्डे पर उपस्थित हैं.

चालीस-पचास यात्रियों की क्षमता वाले उस छोटे से विमान में नौ गज वाली महाराष्ट्रीयन साड़ी पहने हुए केवल यही दोनों महिलाएं हैं. यात्रियों में हिन्दू अधिक नहीं हैं. काँग्रेस में समाजवादी विचारधारा जीवित रखने वाले जयप्रकाश नारायण भी इस विमान में हैं. पूना के एक सज्जन हैं, जिनका उपनाम देव है और उन्हें मौसी जी ने पहचान लिया. परन्तु ये दोनों ही लोग अहमदाबाद में उतर गए. यहां से चढ़ने वाले भी अधिकांशतः मुसलमान ही हैं और ऐसे यात्रियों के बीच में केवल ये दोनों महिलाएं..!

विमान में कुछ उत्साही यात्री, ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगा रहे हैं. एक-दो यात्रियों ने ‘लड़ के लिया है पाकिस्तान, हँस के लेंगे हिन्दुस्तान’ जैसे नारे भी लगाए. परन्तु मौसी जी का आत्मविश्वास स्थिर बना रहा, उनका निर्णय पक्का था. उनके चेहरे पर एक कठोरता बनी हुई थी. यह देखकर धीरे-धीरे पाकिस्तान के नारे लगाने वाले चुपचाप बैठ गए…!

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ऑल इंडिया रेडियो, लाहौर केंद्र. रात के 11 बजकर 50 मिनट हुए हैं. रेडियो पर उद्घोषणा की जाती है –“यह ऑल इंडिया रेडियो का लाहौर केन्द्र है. आप चंद मिनट हमारे अगले ऐलान का इंतज़ार कीजिए.” फिर अगले दस मिनट कुछ वाद्य वृन्द बजता है.

ठीक 12 बजकर 01 मिनट पर –
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“अस्सलाम आलेकुम. पाकिस्तान की ब्रॉडकास्टिंग सर्विस में आपका स्वागत है. हम लाहौर से बोल रहे हैं.

कुबुल-ए-सुबह-ए-आज़ादी…!!”

और इस प्रकार, पाकिस्तान के जन्म की अधिकृत घोषणा हो गई..!

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