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याकूब मेनन को ‘ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती’ बनाने में लगे हैं मुसलमान

वर्ष 1993 में हुए बम विस्फोट का दोषी पाए जाने पर जिस याकूब मेनन को फांसी दी गयी थी उसको देश के पूर्ववर्ती आक्रांताओं जैसे ‘मोइनुद्दीन चिश्ती’ एवं ‘अफजल खान ‘ जैसा प्रतिष्ठित महात्मा बनाने की कोशिश में मुसलमान लग गए हैं। सरकारी आंकड़ा है कि1993 में मुंबई में किये गए 13 सिलसिलेवार बम विस्फोटों में 257 लोगों की जान गई थी जबकि 700 से अधिक घायल हुए थे ,मरनेवालों में 100 से ज्यादा स्कूली बच्चे थे।याकूब पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट था और अपने आतंकवादी भाई टाइगर मेमन का गैरकानूनी फाइनेंस भी संभालता था। इतना ही नहीं वह जेल में रहते हुए भी इग्नू से पॉलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था और अंग्रेजी से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर चुका था। मुंबई बेम विस्फोट के बाद वह विदेश भाग गया था और इंटरपोल ने उसे भारतीय एजेंसियों को सौंपा था ,फिर उसे सरकारी हवाई जहाज से नई दिल्ली लाया गया।

चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को स्वयं “सूफी संत का चोला ओढ़कर धोखे से’ पकड़कर उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया।अफजल खान ने महाराष्ट्र में अनेक हिन्दु देवताओं के मंदिरों को तोडा और मंदिर की धन संपदा को लूटा । अफजलखान और उसके सैनिकों ने हज़ारों हिन्दुओंकी हत्या की और हज़ारों महिलाओं पर बलात्कार किया। इसी तरह क्रूर अफज़ल खान ने इसलिए अपनी 63 पत्नियों को मारकर कुँए में फेंक दिया कि कहीं उसकी मौत के बाद उसकी पत्नियां दूसरी शादी न कर लें।इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में लिखा है कि मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आया था। वह अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गया। मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस तरह चिश्ती ने अजमेर की आना सागर झील, जो कि हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, पर बड़ी संख्या में गायों का क़त्ल किया और इस क्षेत्र में गायों के खून से मंदिरों को अपवित्र करने का काम किया था। मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द प्रतिदिन एक गाय का वध करते थे और मंदिर परिसर में बैठकर गोमांस खाते थे।

‘भारत में मुस्लिम शासन की विरासत’ (Legacy of Muslim Rule in India) में इतिहासकार केएस लाल ने लिखा है, “मुस्लिम मुशाहिक (सूफी आध्यात्मिक नेता) उलेमाओं की तरह ही धर्मांतरण को लेकर उत्सुक थे और वे चाहते थे कि हिन्दू यदि इस्लाम अपनाने से इनकार करते हैं तो उन्हें दूसरे दर्जे के नागरिक के तौर पर रखा जाए।”‘द सिनिस्टर साइड ऑफ सूफीवाद’ में, लेखक राम ओहरी ने लिखा है, “कोई भी मुगल, न ही कोई सूफी, कभी भी हिंदू मंदिर में पूजा करने के लिए सहमत नहीं हुआ है, और न ही हिंदू देवी-देवताओं की छवियों के सामने कोई सम्मानपूर्वक तरीके से पेश आया है।” किन्तु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लाखों हिन्दू अज्ञानतावश अथवा सेक्युलरिज्म वाली कुबुद्धि से मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को तीर्थ समझकर अरबों रुपये का चढ़ावा देते हैं और अफजल खान की कब्र को पर्यटन स्थल मानकर का करोड़ों रूपये वहां खर्च करते हैं। आश्चर्य नहीं अगर आनेवाले समय में विशेष नरेटिव्स चलाकर मुसलमान याकूब मेनन जैसे गद्दार को ‘सूफी’ महात्मा सिद्ध करके हिन्दुओं की भीड़ अपने यहां वैसे ही लगा ले जैसा मुंबई में ही ‘एक और हिंदुद्रोही’ हाजी अली की दरगाह पर आज जमा होती है।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद में औरंगजेब तथा प्रतापगढ़ (सतारा) में अफजल खान की कब्रें मुसलमानों द्वारा मजार में बदल दी गयी जिससे इन दोनों हत्यारों की कब्र पहले ‘पर्यटन स्थल ‘ बने फिर उनको विशेष नरेटिव्स चलाकर तीर्थस्थान का दर्जा लोगों के मन में दिला दिया गया है। अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की कब्र यानी मजार पर सबसे अधिक संख्या में हिन्दू जाते हैं। वहां जानेवाले हिन्दुओं के मन में उनके पूज्य तीर्थ पुष्कर और ब्रह्मा जी के मंदिर के प्रति घृणा का भाव भी झूठे कहानियों के द्वारा बैठाया जा चुका है कि ब्रह्माजी अशुभ देवता है और उन्होने अपनी बेटी से विवाह किया था। इसके लिए अजमेर के बदमाश मुसलमान वकीलों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में केस करके ब्रह्मा जी के मंदिर से सरस्वती जी के मंदिर को गुजारा भत्ता की व्यवस्था भी करवाई गयी थी।यह हिन्दुओं के विषय में मुस्लिमों का सशक्त हस्तक्षेप का उदाहरण है जिसके आधार पर हिन्दू मंदिरों का मानभंग करने में उन्हें सुविधा हुई और हिन्दुओं ने ख्वाजा जैसे लाखों हिन्दुओं के हत्यारे को सूफी संत मान लिया।

प्रसंगवश बताना आवश्यक है कि मोइनुद्दीन चिश्ती रोज पवित्र पुष्कर तालाब पर एक गाय काटता था और फिर सबको गौमांस पकाकर दावत देता था , उसने सूफी संत का चोला ओढ़कर पृथ्वीराज चौहान को फंसाया और उन्हें मोहम्मद गौरी को सौंप दिया।मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया। चिश्ती ने खुशी से ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया।सिर्फ इस्लाम की स्थापना था उलेमा और सूफी संतों का लक्ष्य।लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।” ‘

याकूब की फांसी की सजा पर 14 दिन की रोक लगाने के लिए देर रात चीफ जस्टिस के यहां आनंद ग्रोवर के अलावा प्रशांत भूषण, युग मोहित, नित्या रामाकृष्णा सहित 12 टॉप वकील की टीम भी पहुंची थी। तीन बजकर 20 मिनट पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सरकार का पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने याकूब की फांसी को बरकरार रखा। इसमें प्रफुल्ल चंद्र पंत और अमिताभ रॉय शामिल थे। करीब डेढ़ घंटे चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने याकूब की फांसी को बरकरार रखते हुए वकीलों की याचिका खारिज कर दी।
फांसी के बाद याकूब की लाश लेकर पांच लाख से अधिक की संख्या में उसकी मय्यत का जुलुस निकाल भारतद्रोही को अपना सर्वमान्य आदर्श पुरुष बता चुके हैं। अब इन्होने उसकी कब्र को ‘मजार ‘ की तरह सज्ज करना शुरू कर दिया है जिससे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती या अफजल खान की तरह याकूब मेनन को भी महान व्यक्ति बताकर न केवल उसके पापों को छिपाया जाए बल्कि उसकी मजार पर भी हिन्दुओं को लाकर उनसे अनापशनाप धनार्जन भी किया जा सके( देखें देशद्रोही की कब्र को मजार में बदलने की कोशिश का फोटो)। क्या कोई राष्ट्रवादी सरकार किसी राष्ट्रद्रोही का इस तरह महिमामंडन होने दे सकती है ? हमारा विचार है -राज्य सरकार को इस दिशा में कठोर कार्रवाई करनी चाहिए और ऐसी कोशिश को पूरी तरह नष्ट किया जाना चाहिए। हिन्दू समाज को जाग्रत रहना चाहिए कि वह कालांतर में इसको ‘ख़्वाजा याकूबनवाज़ की मजार ‘ मानकर वहां जाना ना शुरू कर दे। उसे मन्नत पूरी करनेवाला पीर बताकर हिन्दुओं को बहकाने के लिए मुसलमान जिस तरह का ‘मजार जेहाद’ चला रहे हैं उसके नरेटिव्स से सभी हिन्दुओं को सचेत -सावधान रहते हुए बचना होगा।

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