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ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के सफल परीक्षण से चीन और पकिस्तान की घिग्घी बंधी

पिछले वर्ष अगस्त में भारतीय प्रशासन द्वारा यह संकेत दिए जाने के बाद कि मोदी सरकार परमाणु हथियारों का उपयोग युद्ध की स्थिति में पहले नहीं करने की राष्ट्रीय नीति की समीक्षा कर सकती हैं एक पखवारे के भीतर दो बार ब्रह्मोस के आधुनिकतम संस्करणों का सफल परीक्षण करके इसने चीन और पकिस्तान दोनों को असहज कर दिया है। अपनी सैन्‍य शक्ति में और वृद्धि करते हुए भारत ने गुरुवार को ओडिशा के तट से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के नए वर्जन (‘ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ के उन्नत समुद्र से समुद्र में वार करने वाले संस्करण )का सफल परीक्षण किया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी आर डी ओ ) के अनुसार बेहतर नियंत्रण प्रणाली सहित अन्य नई तकनीकों से लैस इस मिसाइल को आज सुबह लगभग 10.45 बजे चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के लॉन्च पैड-3 से प्रक्षेपित किया गया।’ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ ने सटीक तरीके से निर्धारित लक्ष्य पर निशाना साधा। रक्षा-सूत्रों ने बताया कि इसके परीक्षण के विस्तृत आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश को इसकी सूचना देते हुए रक्षा वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई दी है।बता दें कि भारत ने आधुनिक सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के एक नए संस्करण का 11 जनवरी को भी भारतीय नौसेना के गुप्त तरीके से निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत आईएनएस विशाखापट्टनम से सफल परीक्षण किया था।

भारत-रूस का संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का उत्पादन करता है जिन्हें पनडुब्बियों, जलपोतों, विमान या भूतल पर स्थित प्लेटफॉर्मों से प्रक्षेपित किया जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल 2.8 मैक या ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना रफ्तार से प्रक्षेपित हो सकती हैं। ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय नौसेना की प्रमुख हथियार प्रणाली है और इसे सभी प्रमुख युद्धपोतों में लगाया जा रहा है।इसका एक पानी के नीचे का संस्करण भी विकसित किया जा रहा है। ब्रह्मोस का उपयोग न केवल भारत की पनडुब्बियों द्वारा किया जाएगा, बल्कि मित्र देशों को निर्यात के लिए भी पेश किया जाएगा।भारत के पास सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के मामले में भारत दुनिया के विकसित देशों की बराबरी करता है. इसके पास प्रहार, पृथ्वी, पृथ्वी-1, पृथ्वी-2, पृथ्वी-3, शौर्य और अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं।

भारत अपने परमाणु हथियारों को आधुनिक बनाता जा रहा है। भारत अब एक ऐसी मिसाइल विकसित कर रहा है जो दक्षिण भारत में अपने सभी अड्डों से चीन को लक्षित कर सकता है। भारत एक ऐसा देश है जिसके कई पड़ोसी देश हैं।यह व्यापक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारत की आर्थिक और सैन्य व्यवस्था में निरंतर प्रगति के कारण पिछले एक-डेढ़ दशक में भारत के प्रति चीन एवं पाकिस्तान के दृष्टिकोण में नाटकीय बदलाव हुआ है।अमेरिकी विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की परमाणु रणनीति, जो पारंपरिक रूप से पाकिस्तान पर केंद्रित है,अब चीन पर ज्यादा ध्यान दे रहीं है। भारत अब एक ऐसी मिसाइल विकसित कर रहा है जो दक्षिण भारत में अपने सभी अड्डों से चीन को लक्षित कर सकता है। ‘इंडियन न्यूक्लियर फोर्सेज़ 2017’ में हैन्स एम. क्रिस्टेन्सन और रॉबर्ट एस. नॉरिस ने लिखा है कि “भारत ने 600 किलोग्राम वेपन-ग्रेड (जो कि हथियारों में इस्तेमाल किया जाने वाला प्लूटोनियम होता है )तैयार कर लिया है, जिनसे वह 150-200 परमाणु हथियार बना सकता है। लेकिन संभवतः उसने सिर्फ 120-130 हथियार बनाए हैं”। भारत ने अपने परमाणु सिस्टम को आधुनिक बनाने के साथ-साथ विकसित भी किया है. विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास 7 परमाणु-सक्षम सिस्टम हैं, जिनमें दो विमान, चार ज़मीन पर चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और एक समुद्र में स्थित बैलिस्टिक मिसाइल। ‘इंडियन न्यूक्लियर फोर्सेज़ 2017’ आलेख के अनुसार भारत चार परमाणु सिस्टम और विकसित कर रहा है. इसमें लम्बी दूरी की ज़मीन और समुद्र से मार करने में सक्षम मिसाइलों को अगले एक दशक तक तैनात किया जा सकता है।

चीन की DF-26/21 मिसाइल की मारक क्षमता करीब 4 हजार किलोमीटर तक है और इसकी जद में भारत के ज्‍यादातर शहर आते हैं। चीन ने इसे लद्दाख से मात्र 500 किलोमीटर की दूरी पर तैनात किया है। यह मिसाइल अपनी दोहरी क्षमता के लिए दुनियाभर में कुख्‍यात है।अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास 12 से 15 हजार किमी तक मार करने वाली डोंगफेंग अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें हैं। साल 2018 में चीन के पास 75 से लेकर 100 मिसाइलें थीं।

भारत ने कभी भी सार्वजनिक रूप से अपने परमाणु शस्त्रागार का आकार जारी नहीं किया है।आकलन 130-140 परमाणु वारहेड के बीच एक भंडार को अनुमानित करता है। हालांकि, कम से कम 600 किलोग्राम हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम है, जो 150-200 परमाणु युद्ध के लिए पर्याप्त है। भारत वर्तमान में एक नो फर्स्ट यूज़ नीति (No First Use policy) रखता है, लेकिन अगस्त 2019 में भारतीय अधिकारियों द्वारा की गई टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि मोदी सरकार इस नीति पर पुनर्विचार कर सकती है। भारत के पास पूर्ण परमाणु परीक्षण है और वह वर्तमान में आधुनिकीकरण कर रहा है।

ऐसा कहा जा रहा है कि ठोस-ईंधन और रेल-मोबाइल युक्त दो चरणों वाला अग्नि-2 मिसाइल, अग्नि-1 का ही विस्तृत रूप है. परंपरागत या परमाणु युद्धपोत से प्रक्षेपण में सक्षम इस मिसाइल को 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक प्रक्षेपित किया जा सकता है और संभवतः यह चीन के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्र को अपना निशाना बना सकता है। हालांकि अग्नि-4 पूर्वोत्तर भारत से बीजिंग और शंघाई सहित लगभग सभी चीन में विचित्र लक्ष्यों के लिए सक्षम होगा.
भारत लंबी-दूरी के लिए एक ठोस-ईंधन, रेल-मोबाइल, सतह से सतह पर मार करने वाला यह निकट-अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) युक्त तीन-चरणों वाला अग्नि -5 बनाया हैं जो कि 5000 किलोमीटर (3,100 से अधिक मील) से अधिक दूर स्थित लक्ष्य को भी भेद सकता है.

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