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क्रय शक्ति एवं भारतीय अर्थव्यवस्था का बढ़ता आकार

क्रय शक्ति यह अंतर्राष्ट्रीय विनिमय का एक सिद्धांत है।इसका अर्थ किन्हीं दो देशों के बीच वस्तु या सेवा की कीमत में मौजूद अंतर से लिया जाता है।क्रय शक्ति समता के आधार पर  किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार का पता लगाया जा सकता है।क्रय शक्ति समता के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि दो देशों के बीच मुद्रा की क्रयशक्ति में कितना अंतर या फिर समता मौजूद है। क्रय शक्ति समता द्वारा मुद्रा विनिमय दर को तय किया जाता है।

यदि भारतीय रुपये की विदेशी मुद्रा उदाहरण के तौर पर अमेरिकी डॉलर के साथ तुलना करी जाए तो एक डॉलर की कीमत वर्तमान में ८० भारतीय रुपये के करीब है। तब क्या यह समझ लिया जाए कि, अमेरिका में यदि कोई वस्तु 1 डॉलर में मिलती है तो भारत में उसकी कीमत ८०  रुपये होगी? अगर आपका जवाब हाँ है तो आप गलत हैं।विदेशी मुद्रा विनिमय दर बाज़ार के बहुत से कारकों पर निर्भर करती है ।

आइए विस्तार से समझते हैं क्रय शक्ति को, क्रय शक्ति का अर्थ है कि, किसी मुद्रा की एक निश्चित राशि (जैसे 100 भारतीय रुपये) से कितनी मात्रा में सेवाएं या वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। इसे एक उदाहरण की सहायता से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए अमेरिका में एक पानी की बोतल के लिए 1$ का भुगतान करना पड़ता है।यदि सामान्य स्थिति में सोचें तो भारत में इसकी कीमत ८०  रुपये होनी चाहिए किन्तु भारत में वही पानी की बोतल 20 रुपये में मिल जाती है। इस प्रकार 1 डॉलर की क्रय शक्ति 20 रुपये के बराबर हुई अर्थात 1 डॉलर तथा 20 रुपये से समान वस्तुएं अथवा सेवाएं खरीदी जा सकती हैं। इस तरीके से दो देशों की मुद्राओं की क्रय शक्ति की तुलना कर उनके मध्य रहने के खर्च या Living cost की गणना करी जाती है।

इसके अतिरिक्त क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity in Hindi) के आधार पर आप दो भिन्न देशों में किसी कार्य को करने पर मिलने वाले मानदेय या सैलरी की तुलना भी कर सकते हैं। उदाहरण की बात करें तो अमेरिका में एक लाख डॉलर सालाना कमाने वाले व्यक्ति का रहन-सहन भारत में 30 लाख रुपये सालाना कमाने वाले व्यक्ति की तुलना में निम्न स्तर का होगा।

क्रय शक्ति सूचकांक

Purchasing Power Parity (PPP) वर्ल्ड  बैंक द्वारा जारी किया जाता है। इसमें दैनिक जीवन में इस्तेमाल किये जाने वाले प्रमुख उत्पादों तथा सेवाओं की एक बास्केट बनाई जाती है। विभिन्न देशों में उस बास्केट की कीमत ज्ञात कर प्रत्येक देश की मुद्रा की क्रय शक्ति डॉलर की तुलना में प्रदर्शित की जाती है। विश्व बैंक द्वारा जारी वर्ष 2019 की रिपोर्ट के अनुसार 1 अमेरिकी डॉलर की क्रय शक्ति 21.21 रुपये के बराबर है।

क्रय शक्ति के आधार पर GDP की गणन

विभिन्न देशों की GDP की गणना सर्वप्रथम उनकी घरेलू मुद्रा में की जाती हैं तत्पश्चात उसे डॉलर में (बाज़ार विनिमय दर के अनुसार) परिवर्तित कर प्रदर्शित किया जाता है। इसे नॉमिनल जीडीपी कहा जाता है। किन्तु यदि क्रय शक्ति के अनुसार देखें तो 1 डॉलर 21 रुपयों बराबर है। अतः भारत की जीडीपी को डॉलर में प्रदर्शित करनें के लिए यदि क्रय शक्ति की विनिमय दर को ध्यान में रखा जाए तो भारत की जीडीपी पूर्व की तुलना में तीन गुने से भी अधिक होगी। यही कारण है कि, भारत की नॉमिनल जीडीपी 2.94 ट्रिलियन है, जबकि क्रय शक्ति समता के अनुसार जीडीपी 10.5 ट्रिलियन है ।

क्रय शक्ति एवं बाज़ार विनिमय दर में तुलना नीचे कुछ देशों के मुद्राओं की क्रय शक्ति एवं बाज़ार विनिमय दर की तुलना एक अमेरिकी डॉलर से की गयी है।

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