भोपाल में वर्षा योग चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के दर्शनार्थ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल समर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही, विभिन्न सामाजिक, आध्यात्मिक एवं राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा की।
आचार्य श्री के सान्निध्य में हुए इस संवाद में समाज सेवा, शिक्षा, स्वावलंबन, जीवदया और भारतीय संस्कृति के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
सेवा, स्वावलंबन और संस्कारों के प्रकल्पों पर चर्चा
संवाद के दौरान आचार्य श्री द्वारा प्रेरित विभिन्न सेवा एवं जनकल्याणकारी प्रकल्पों की चर्चा हुई। दयोदय गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास, हथकरघा केंद्रों के माध्यम से श्रमिकों को रोजगार एवं स्वावलंबन से जोड़ने की पहल, प्रतिभास्थली शिक्षण संस्थान, आयुर्वेदिक चिकित्सालय तथा देश के विभिन्न स्थानों पर निर्मित हो रहे भव्य पाषाण जिनालय प्रमुख रहे।
इन प्रकल्पों के माध्यम से जीवदया, भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कारयुक्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, श्रम की गरिमा और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का भावपूर्ण स्मरण
संवाद का एक भावुक क्षण वह रहा, जब डॉ. मोहन भागवत जी ने परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में गुरुवर के अंतिम दर्शन से जुड़ी अपनी स्मृतियां भी साझा कीं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, करुणा, स्वदेशी, स्वावलंबन और मानव कल्याण के आदर्शों का अनुपम उदाहरण रहा है। उनके द्वारा प्रेरित सेवा कार्य आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ यह संवाद आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सेवा, स्वावलंबन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रेरक प्रसंग रहा। लगभग एक घंटे तक डॉ. मोहन भागवत जी अचार्य संघ के चातुर्मास स्थल पर रहे और भोपाल में बन रहे जिनालय को भी देखा। इस अवसर पर भोपाल जैन समाज के प्रमुख पदाधिकारी सहित जैन समाज के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ. मोहन भागवत जी का शॉल, श्रीफल और तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
