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21 अगस्त से स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जन्म शताब्दी महोत्सव का शुभारंभ

भुवनेश्वर, 19 अगस्त: विधर्म चक्र विदारक, दक्ष महारथी, वेदांत केसरी, राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वतीजी का जन्म शताब्दी महोत्सव श्रावण शुक्ल नवमी तिथि, 21 अगस्त से प्रारंभ हो रहा है। आगामी वर्ष नवंबर 2027 तक पूरे भारत में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जन्म शताब्दी महोत्सव समिति, ओडिशा की ओर से बुधवार को आयोजित एक पत्रकार वार्ता में जानकारी दी गई कि अकेले ओडिशा के 25 हजार स्थानों पर यह महोत्सव मनाया जाएगा। 21 अगस्त को आयोजित होने वाले शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ ओड़िशा के माननीय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी करने वाले हैं। इस मौके पर सम्माननीय विधानसभाध्यक्ष सुरमा पाढी एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षामंत्री की गरिमापूर्ण उपस्थिति रहेगी।

पत्रकार वार्ता में संगठन के अध्यक्ष स्वामी जीवनमुक्तानंदपुरी और संयोजक बिनय कुमार भूयां ने बताया कि 21 अगस्त को तालचेर के गुरुजंगा में इस कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन होगा।

उद्घाटन कार्यक्रम की रूपरेखा

मुख्य कार्यक्रम: कलश शोभायात्रा, गो पूजन, यज्ञ, नगर परिक्रमा, धर्मसभा, प्रसाद सेवन और शताब्दी कार्यकर्ताओं की बैठक।

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजन: शाम को गाँव के विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या, नृत्य, पाला, पूज्य संतों द्वारा प्रवचन और स्वामीजी के जीवन-आदर्शों पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन।

प्रमुख अतिथि: संत ब्रह्मानंद सरस्वती, सच्चिदानंद महाराज, शिवदास बाबा, स्मृति सागर महाराज, जीवन चैतन्य महाराज, सच्चिदानंद दास महाराज, बाबाजी विश्वनाथ दास, शरधानंद सरस्वती, अविनाश बाबा सहित कई साधु-संत उपस्थित रहेंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह दुर्गा प्रसाद साहू तथा राज्य के अन्य प्रमुख महानुभाव भी उपस्थित रहकर मार्गदर्शन करेंगे।

वर्षभर के कार्यक्रमों का विवरण :-

23 अगस्त से 4 सितंबर:
23 अगस्त (बलिदान दिवस) से 4 सितंबर (बलिदान तिथि – जन्माष्टमी) तक गाँवों और बस्तियों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होंगी।

अक्टूबर 2026: चकापाद में संस्कृत सम्मेलन और जलेसपटा में महिला सम्मेलन।

नवंबर 2026: संबलपुर में प्रथम महासम्मेलन, ब्रह्मपुर में द्वितीय महासम्मेलन और भुवनेश्वर में तृतीय महासम्मेलन का आयोजन। इसके अलावा हरिद्वार, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे प्रमुख नगरों में महा-समावेश आयोजित होंगे।

2027 (जनवरी से मई): जनवरी से अप्रैल तक प्रत्येक गाँव और बस्ती में संतों द्वारा ‘जागरण यात्रा’ निकाली जाएगी। अप्रैल और मई में ब्लॉक तथा शहर स्तर पर विशाल हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा।

स्वामीजी का जीवन और योगदान

पत्रकार वार्ता में स्वामी जीवनमुक्तानंदपुरी ने बताया कि एक संन्यासी होते हुए भी स्वामीजी ने मोक्ष साधना का व्यक्तिगत मार्ग त्यागकर देश, समाज सेवा और धर्म रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया।

स्वतंत्रता व समाज सेवा: 14 वर्ष की आयु में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान युद्ध पीड़ितों की सेवा की।

शिक्षा व स्वास्थ्य: उनके प्रयास और प्रेरणा से कंधमाल में 2 संस्कृत विद्यालय, 2 महाविद्यालय, तुलसीपुर में 1 उच्च विद्यालय तथा कंधमाल में महिलाओं के लिए रात्रि पाठशालाएं शुरू की गईं। उन्होंने कंधमाल के कटिंगिया में आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र तथा रायगडा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए।

कृषि व पर्यावरण: स्वामी जी स्वयं जैविक खेती और गोपालन करते थे तथा स्थानीय लोगों को इसका प्रशिक्षण देते थे। छोटे- छोटे चेक डैम बनाकर सिंचाई की व्यवस्था की, कटिंगिया में कृषि सहकारी समिति बनाई, वनों की सुरक्षा के लिए ग्राम समितियां गठित कीं और प्लास्टिक के उपयोग का त्याग व घर-घर तुलसी का पौधा लगाने का आह्वान किया।

सामाजिक व धार्मिक जागृति: गाँव-गाँव में कीर्तन मंडली, जगन्नाथ रथयात्रा, धरणी पेनू यात्रा, पंच महायज्ञ और सप्त महायज्ञ आयोजित कराए। कंधमाल और गजपति में 5 मंदिरों का निर्माण कराया तथा कंधमाल में महिला कीर्तन मंडली की शुरुआत की।

गो रक्षा व बलिदान: 1966 में दिल्ली में स्वामी करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में गो रक्षा आंदोलन में भाग लेकर 18 दिन जेल में रहे। 1967 में ओडिशा में अपने नेतृत्व में गो रक्षा आंदोलन चलाकर ढाई महीने का कारावास भोगा। धर्म रक्षा हेतु धर्मांतरित हिंदुओं की स्वधर्म वापसी कराने के कारण 2008 में जन्माष्टमी के दिन विधर्मियों ने उनकी तथा उनके 4 सहयोगियों की निर्मम हत्या कर दी थी।

पंच संकल्प का आह्वान:-


महान विभूति स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वतीजी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उनके विचारों व जीवन संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए श्री बिनय कुमार भूयां ने समाज से पंच संकल्प को लागू करने की अपील की है।
ये पंच संकल्प हैं:

  • हिंदू धर्म की सुरक्षा (धर्मांतरण रोकना)
  • घर-घर गोपालन
  • सघन वृक्षारोपण
  • मां, माटी और मातृभाषा की रक्षा
  • भारतीय संस्कृति का संरक्षण
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