..क्या है ९ अगस्त — समझिए…
हर साल ९ अगस्त को हम DJ लगाते हैं, रैली निकालते हैं, जश्न मनाते हैं। पर एक पल रुकिए और खुद से पूछिए — हम ये आखिर क्यों करते हैं? और ९ अगस्त ही वो दिन क्यों?
१२ अक्टूबर १४९२ को कोलंबस अमेरिका पहुँचा। उसके पीछे-पीछे आए यूरोपीय उपनिवेशवादियों ने GOD, GLORY और GOLD — इन तीन उद्देश्यों से वहाँ के मूलनिवासियों पर अत्याचार शुरू किया।
बीमारी, युद्ध, गुलामी, भुखमरी और सीधे हमले — इन सबसे लगभग ५ से १० करोड़ मूलनिवासी मारे गए। कुल मूल आबादी का करीब ९०%। इतिहासकार इसे ‘The Great Dying’ — महामृत्यु कहते हैं।
और जिस इतिहास में इतना बड़ा नरसंहार हुआ, उसी की याद में संयुक्त राष्ट्र ने ९ अगस्त को यह दिन घोषित किया।
तो सवाल यह है — जिनकी मौत को याद करने के लिए यह दिन बना, उनकी पीड़ा पर DJ पर नाचना क्या शोभा देता है?
यह दिन उत्सव नहीं — यह स्मरण और आत्मचिंतन का दिन है

इसीलिए —
अगर हमें अपना सच्चा गौरव, अपने महापुरुष, अपनी संस्कृति और परंपरा मनानी है, तो सही दिन मनाएँ।
मैं मनाऊँगा — १५ नवंबर, भगवान बिरसा मुंडा जयंती!
अपने पूर्वजों का त्याग, अपनी माटी, अपनी पहचान — इसका सच्चा स्मरण और गौरव यही है।
इस संदेश को हर आदिवासी भाई-बहन तक पहुँचाइए। सोच बदलेगी, तभी दिशा बदलेगी।
जय बिरसा!